अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में तैनात 1000 अस्थायी सहायक प्रोफेसरों ने हिमाचल, पंजाब और ओडिशा का तर्ज पर अपनी नौकरी सुरक्षित करने की गुहार लगाई है। हरियाणा विश्वविद्यालयों के अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों के प्रदेश स्तरीय संगठन हरियाणा यूनिवर्सिटीज कांट्रेक्चुअल टीचर्स संघ, हरियाणा (हुकटा) ने यह मांग रखी है। हुकटा का कहना है इस मामले को लेकर कई बार सरकार के साथ बैठक हो चुकी है, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है। संघ ने चेताया है कि अगर उनको हटाया गया तो वह बड़े स्तर पर आंदोलन चलाएंगे।
गौर हो अस्थायी सहायक प्रोफेसरों को हटाने के लिए सरकार की ओर से विश्वविद्यालयों में पक्की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। इससे 15 सालों से सेवाएं दे रहे हजार सहायक प्रोफेसरों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। सरकार के इस फैसले से सहायक प्रोफेसरों के साथ-साथ उनके परिजनों में भी रोष है। सोनीपत से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र पवार ने भी यह मामला विधानसभा में रखा था और इनको स्थायी करने की मांग की थी।
हुकटा के अध्यक्ष विजय मलिक और सहसचिव अरुण गर्ग ने कहा कि प्रदेश के 14 सरकारी विश्वविद्यालयों में लगभग 1000 असिस्टेंट प्रोफेसर अनुबंधित, अस्थायी व विजिटिंग फैकल्टी के रूप में 3 से 15 वर्षों से वर्कलोड पर कार्यरत हैं। इन सभी की नियुक्ति यूजीसी के मापदंडों के अनुसार ही नियमानुसार की गई थी। उनकी मांग है कि हिमाचल प्रदेश, ओडिशा व पंजाब की तर्ज पर विश्वविद्यालय के अनुबंधित शिक्षकों का रोजगार (हरियाणा के सरकारी विद्यालयों के अतिथि अध्यापकों की तरह) पॉलिसी बनाकर नियमित करें या नियमित होने तक रोजगार की सुरक्षा प्रदान की जाए।