कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए बुजुर्गों को बचकर रहने की दी जा रही सलाह तनाव को बढ़ा रही है। घर से लेकर सूचना के तमाम माध्यमों से बुजुर्गों के लिए खतरे की चेतावनी का प्रसारित होना तनाव के स्तर को दिनोंदिन बढ़ा रहा है। आलम यह है कि इस समस्या के समाधान के लिए पीजीआई और जीएमसीएच-32 टेलीकंसल्टेशन सर्विस पर हर दिन 150 से 200 ऐसे फोन आ रहे हैं, जिसमें बुजुर्गों के मानसिक तनाव पर काबू पाने के उपाय पूछे जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति से बचाव के लिए जरूरी है कि उन्हें बात-बात पर रोका टोका न जाए। पीजीआई मनोरोग विभाग के डॉ. एसके मट्टू का कहना है कि कोरोना के डर से लोग इतना ज्यादा तनाव में हैं कि वह हर वक़्त इसके बारे में ही सोचने लगे हैं। घर में, फोन काल पर, टीवी पर, पेपर में, सोशल साइट्स पर कोरोना छाया हुआ है। इसका दुष्प्रभाव सबसे ज्यादा वृद्धों पर पड़ रहा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार वृद्धों में संक्रमण का खतरा ज्यादा होने की जानकारी तनाव के स्तर को बढ़ा रही है। इससे उनमें झल्लाहट, गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। नतीजन वे समय पर खाना, सोना, घूमना यहां तक कि दवा लेना भी नजरअंदाज करने लगे हैं। ऐसी स्थिति घातक सिद्ध हो सकती है।
केस- 1: सेक्टर-32 निवासी नरेंद्र सिंह आर्मी से रिटायर है। कोरोना के पहले सुबह-शाम वह 5 किमी की सैर करते थे। दोस्तों के साथ कॉलोनी के पार्क में घंटों हंसी-मजाक का दौर चलता था, लेकिन अब पिछले 4 महीने से सब लगभग बंद है। वह घर में अकेले रहते हैं। पिछले एक महीने से उन्हें बीपी की परेशानी शुरू हो गई है। इस समस्या के समाधान के लिए परिजनों ने टेली कंसल्टेशन के माध्यम से विशेषज्ञ से परामर्श ली तो पता चला कि उनका अकेलापन परेशानी की मुख्य वजह है।
केस- 2: गुरदासपुर के 65 वर्षीय सुखविंदर को शुगर और हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है। 4 महीने पहले तक वह बिल्कुल ठीक थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी स्थिति खराब होती गई। मौजूदा समय में उनका शुगर लेवल काफी बढ़ गया है। बीपी अनियंत्रित रहता है। वह बात-बात पर घरवालों पर गुस्सा करने लगे हैं। इतना ही नहीं, वह शुगर और बीपी की दवाई लेने में भी लापरवाही बरतने लगे हैं। इसका असर उनकी सेहत पर पड़ रहा है। परिजनों का कहना है कि अचानक से उनके व्यवहार में परिवर्तन से सभी परेशान हैं। दवा लेने के लिए कहने पर वह कई बार उसे खाने की बजाय बाहर फेंक दे रहे हैं।
मरने वालों में बुजुर्ग ज्यादा
शहर में अब तक कोरोना से 13 लोगों की जान जा चुकी है। मरने वालों में बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है। इससे भी बुजुर्ग तनाव में हैं। वहीं, अन्य बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्गों को डर सता रहा है कि कही वह संक्रमण के शिकार न हो जाएं। ऐसे में मानसिक तनाव का बढ़ना लाजिमी है।
बुजुर्गों के साथ समय बिताएं बच्चे
विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति से बचाव के लिए जरूरी है कि घर के लोग खासतौर पर बच्चे उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। उनके साथ खेलें, किस्स-कहानियां सुनें और सुनाएं। उनके साथ नाश्ता और खाना खाएं। आहार का ध्यान रखें। खाली बैठने या सिर्फ सोते रहने की बजाय खुद को व्यस्त रखने का प्रयास लाभदायक होगा।
मनोरंजन के जो भी साधन उपलब्ध हों, उनका उपयोग करे। अपनों के साथ फोन, ई-मेल, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य माध्यमों से जुड़े रहें। उनसे अपने मन की बातों को साझा करें। किसी भी तरह की मानसिक या शारिरिक समस्या होने पर बिना देर किए डॉक्टर और अस्पताल से संपर्क करें। अस्पतालों में 24 घंटे इमरजेंसी सेवा उपलब्ध है।
ये करें परिजन
- सुबह-रात साथ खाने का समय न हो तो सुबह की चाय साथ पीएं।
- बच्चों को बोलें कि वह अपने दादा-दादी के साथ ज्यादा समय बिताएं।
- कोरोना वायरस से जुड़ी खबरों वाले समाचार से बचाएं, धार्मिक सीरियल दिखाएं।
- बाहर जाने के खतरे को मित्रवत भाषा में समझाएं, बताएं कि घर पर रहने में ही भलाई है।
- घर की गैलरी और बगीचा है तो उसमें घुमाएं, योग नियमित करने के लिए प्रेरित करें।