चंडीगढ़। सरकार की कथित जनशिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ शिक्षक 31 जुलाई को करनाल में मुख्यमंत्री आवास पर रोष प्रदर्शन करेंगे। प्रदर्शन में शिक्षकों व विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ संबद्ध हरियाणा कर्मचारी संघ एवं एसटीएफआई के महासचिव प्रभु सिंह ने कहा कि इस प्रदर्शन में सभी जिलों से हजारों की संख्या में अध्यापक शामिल होंगे। यदि सरकार ने समय रहते मांगों का हल नहीं किया तो आंदोलन को सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के साथ मिलकर और तेज किया जाएगा।
सिंह ने कहा कि मांगों को लेकर सरकार को जिला स्तरीय रैलियों, राज्य स्तरीय प्रदर्शनों के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किए गए। 182 दिन यमुनानगर में क्रमिक अनशन किया। शिक्षा मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं विभाग के निदेशकों से भी पत्राचार द्वारा द्विपक्षीय वार्ता से मामले हल करने की अपील लगातार प्रेषित कर रहे हैं। लेकिन सरकार व विभाग संवेदनहीन बने बैठे हैं। इस कारण विवश होकर बार-बार शिक्षकों व कर्मचारियों को सड़कों पर उतरना पड़ता है।
ये हैं मांगें
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को वापस लिया जाए, बंद किए गए 4801 स्कूलों को पुन: खोला जाए, पुरानी पेंशन स्कीम बहाल की जाए, गरीबों को शिक्षा से वंचित करने वाली चिराग योजना वापस ली जाए। इसके अलावा अस्थायी शिक्षकों को रेगुलर करने, सभी विद्यालयों में प्रत्येक विषय, कक्षा के लिए अध्यापक देने, व्यावहारिक रेशनलाइजेशन करते हुए 8 वर्षों से प्रतीक्षारत जेबीटी शिक्षकों सहित सभी वर्गों के सामान्य तबादले करने, खाली पदों पर शीघ्र स्थायी भर्ती करने, मॉडल संस्कृति स्कूलों में भी शिक्षा अधिकार अधिनियम का पालन करने, मेवात मॉडल स्कूलों के शिक्षकों का पूर्ण रूप से शिक्षा विभाग में मर्जर करने, सेवा नियमों में आवश्यक संशोधन करने और हरियाणा कौशल रोजगार निगम को भंग करने समेत अन्य मांगें हैं।