चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में 4 लाख फर्जी दाखिलों के मामले में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी(डीईईओ) मिड डे मिल इंचार्जों की जानकारी नहीं दे रहे हैं। दस दिन पहले विभाग ने 8 जिलों के डीईईओ से इस संबंध में जानकारी मांगी थी, लेकिन अभी तक डाटा नहीं भेजा गया है। सोमवार को शिक्षा निदेशालय ने फिर से सभी डीईईओ को पत्र भेजकर 30 जुलाई शाम 3 बजे तक यह ब्योरा मांगा है। इन सभी 22 जिलों के अधिकारियों से पूछा है कि स्कूल वाइज कितने विद्यार्थियों को मिड डे मिल का राशन मिलता था। इस बार मिड डे मिल इंचार्ज के साथ साथ डीडीओ पावर अधिकारी का नाम भी मांगा है।
राज्य के सरकारी स्कूलों में हुए 4 लाख फर्जी विद्यार्थियों के दाखिले और करोड़ों रुपये घोटाले के मामले में सीबीआई सात एफआईआर दर्ज कर चुकी है। सीबीआई द्वारा रिकार्ड तलब किए जाने के बाद अब निदेशालय फील्ड से ब्योरा मंगवा रहा है। 20 जुलाई को विभाग ने आठ जिलों के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों से 2014 से लेकर 18 तक बीच मिड डे मील इंचार्जों (मास्टर या हैडमास्टर) के नाम मांगें हैं। इनमें अंबाला, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, जींद, पंचकूला और यमुनानगर जिले शामिल हैं। निदेशालय ने प्रोफार्मा में जिला, स्कूल कोड, स्कूल का नाम, साल 2014-15., 2015-16, 2016-17, 2017-18 के तहत का रिकार्ड मांगा था, लेकिन अभी तक फील्ड के अधिकारियों ने इनके नाम नहीं भेजे हैं।
गौर हो कि करोड़ों रुपये के इस घोटाले में मिड डे मील में फर्जीवाड़ा, छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़े समेत किताबों के साथ साथ अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का आरोप है। दरअसल, जिन विद्यार्थियों के नाम पर स्कूल में राशन मंगवाया गया व अन्य वित्तीय मदद ली गई, वे विद्यार्थी स्कूल में थे ही नहीं। केवल खानापूर्ति के लिए स्कूलों में विद्यार्थियों नाम लिख दिए गए। अब सीबीआई इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।