अध्यापक नेताओं विक्रम देव, दविंदर सिंह ने कहा कि ईजीएस, एआईई, एसटीआर, आईईवी, आईईआरटी, शिक्षा प्रोवाइडर अध्यापकों की सेवाओं को रेगुलर करने के बजाय दशकों से कच्चे रखकर उनका शोषण किया जा रहा है। 8886 एसएसए, रमसा, आदर्श माडल स्कूल अध्यापकों की तनख्वाह कटौती को वापस लेने के बजाय मिलती तनख्वाहों पर भी रोक लगाई जा रही है।
विभागीय 5178 अध्यापकों को नियुक्ति पत्र की शर्तों के अनुसार भी रेगुलर करने का नोटिफिकेशन जारी करने से बचा जा रहा है। कंप्यूटर अध्यापकों को विभाग में शिफ्ट करने, आदर्श स्कूल अध्यापकों को रेगुलर करने समेत स्कूल विभाग में लाने, शिक्षा सचिव को विभाग से हटाने, स्टूडेंट्स की वर्दियां व वजीफे जारी करने, सारी कैडरों की पदोन्नितयां करने, महंगाई भत्तों की बकाया सारी किश्तों का भुगतान करने, पुरानी पेंशन प्रणाली की बहाली और तनख्वाह कमिशन की रिपोर्ट जारी करने की मांग की।
धारा 144 लागू होने के बावजूद बिना मंजूरी के पिछले रविवार को धरना-प्रदर्शन करने वाले 54 अध्यापकों के खिलाफ पुलिस ने विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया। डीएसपी सिटी वन योगेश कुमार ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। जिन 54 अध्यापकों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है, उनमें 10 अध्यापक नामजद हैं।
इनमें हरदीप टोडरपुर, दविंदर पुनिया, सुखविंदर चाहल, हरजीत सिंह, बलकार सिंह, बाज सिंह खैरा, दीदार सिंह मुदकी, अमृतपाल सिंह सिद्धू, सुखराज सिंह और हरविंदर सिंह शामिल हैं। इन अध्यापकों के खिलाफ सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने, पुलिस मुलाजिमों के साथ लड़ाई झगड़ा करने, उन्हें चोटें मारने और धारा 144 के उल्लंघन के आरोप में केस दर्ज हुआ है।
डीएसपी सिटी वन योगेश कुमार ने बताया कि पटियाला जिले में धारा 144 लगी हुई है, जिसके तहत बिना मंजूरी के पांच या इससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है। बावजूद इसके अध्यापकों ने बिना मंजूरी के रोष मार्च निकाला और धरना प्रदर्शन किया। जब पुलिस मुलाजिमों ने उन्हें रोका, तो उनके साथ मारपीट की, और लड़ाई-झगड़ा किया।
उन्होंने बताया कि फिलहाल इस मामले में किसी अध्यापक की गिरफ्तारी नहीं हुई है। गौरतलब है कि रविवार को प्रदर्शन के दौरान एसपी हेडक्वार्टर हरविंदर सिंह विर्क ने बताया था कि अध्यापकों को रोकने के दौरान उनके समेत 10 पुलिस मुलाजिम जख्मी हुए हैं।