चंडीगढ़। शहर में विशेष बच्चों के लिए कई शिक्षा संस्थान बनाए गए हैं। इनमें विशेष बच्चों को पढ़ाई कराई जाती है। साथ ही उनकी रुचि के अनुसार कुछ न कुछ बनाना भी सिखाया जाता है। इन संस्थानों में पढ़ाने वाले टीचर्स के सामने कई तरीके की चुनौतियां हैं लेकिन वह बच्चों के साथ बेहतर तालमेल बिठाकर इन्हें तैयार करते हैं। राजकीय बौद्धिक दिव्यांग जन पुनर्वास संस्थान (ग्रिड) सेक्टर 31 में स्पेशल बच्चों का संस्थान है। जहां इन दिव्यांग बच्चों को पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियां कराई जाती हैं। इनकी रुचि के अनुसार इन्हें पढ़ाया जाता है। पढ़ाई के साथ वोकेशनल और जिनकी रुचि खेल गतिविधियों में होती है उन्हें ट्रेनिंग दी जाती हैं। यहां प्री प्राइमरी के लिए 5-6 वर्ष की उम्र तक के बच्चों को रखा जाता है। प्राइमरी में 12-13 वर्ष, सेकेंडरी में 14- 15 वर्ष की उम्र के बच्चों को लिया जाता है।
आत्मनिर्भर बनाने दिया जाता है ध्यान
ग्रिड में स्पेशल एजुकेटर रहे हेमंत कुमार ने बताया कि चुनौतियां तो बहुत होती हैं लेकिन हम इन बच्चों से तालमेल और दोस्ताना माहौल में उन्हें तैयार करते हैं। इंस्टीट्यूट में आते हैं तो कई को बटन बंद करना नहीं आता। जूता बांधना नहीं आता, इनमें से कई अति चंचल होते हैं। अलग अलग तरह की आदतें होती है। इन्हें ऑब्जर्व करने के बाद ट्रेनिंग देने का काम शुरू होता है। हमें इनके जैसा ही बनकर दिखाते हुए उनका विश्वास जीतना होता है।