स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) द्वारा पकड़े गए बृजेंद्र नैन से पूछताछ में पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं। जेबीटी और टीजीटी भर्ती घोटाले में गिरोह के सरगना ने हरियाणा के जिलों से नौकरी के लिए आवेदन करने वाले युवकों से संपर्क कर सौदा तय करने की जिम्मेवारी अलग अलग लोगों की लगाई थी।
हर जिले के इंचार्ज को प्रति व्यक्ति एक लाख रुपये का कमीशन मिलना था। पूछताछ में पता चला है कि मामले में फरार चल रहे सुरेश यादव को नजफगढ़, रविंद्र को रेवाड़ी, सत्येंद्र हुड्डा को सोनीपत और बृजेंद्र नैन को हिसार की जिम्मेवारी दी गई थी।
पुलिस अब मामले में फरार चल रहे टीचर सत्येंद्र हुड्डा और रेवाड़ी से घोटाले का मोड्यूल चलाने वाले रविंद्र के पीछे लगी हुई है। पुलिस को उम्मीद है कि इनकी गिरफ्तारी के बाद वह घोटाले के मुख्य आरोपी मिथिलेश पांडे तक पहुंच सकती है। फिलहाल मिथिलेश पांडे उर्फ गुरु जी का एसआईटी सुराग नहीं लगा पाई है।
एसपी रवि कुमार ने बताया कि पहले तो पुलिस का ध्यान सिर्फ भर्ती हुए जेबीटी टीचरों की जांच की तरफ था। लेकिन पुलिस अब भर्ती हुए टीजीटी टीचरों की भी जांच करेगी। आरोपी ने कस्टडी में खुलासा किया है कि सात लाख रुपये जेबीटी भर्ती के लिए थे तो टीजीटी के लिए रेट दस लाख रुपये था।