कहावत है कि सफलता प्राप्त करनी हो तो जुनून पैदा करो। सेक्टर 21 के गुरप्रीत सिंह प्लाहा ने भंगड़ा सीखने के लिए अपने अंदर के जुनून को जगाया और 15 से ज्यादा भंगडे़ की टीम तैयार कर दी है। उन्हें भंगड़े के अलावा बैले और शम्मी (गिद्दा की तरह पंजाबी नृत्य) में भी महारत हासिल है। वे स्कूलों में जाकर भंगड़े की ट्रेनिंग देते हैं। जरूरतमंद से कोई फीस नहीं लेते हैं। वर्कशॉप करते हैं।
हाल ही में टीएफटी में उन्होंने दो दिन की वर्कशॉप भी लगाई थी। भंगड़े के प्रति उनके जोश का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने नेत्रहीन लड़कियों और सीनियर सिटीजन की टीम तैयार कर दी थी। वे मूल रूप से बाथ फिटिंग की मैन्युफैक्चरिंग कंपनी को संचालित करते हैं। अपने बिजनेस में व्यस्त रहने के बावजूद उनकी जान भंगड़े में बसती है।
जब वे आठवीं क्लास में थे, तभी भंगडे़ का चस्का लग गया था। उस दौरान वे नार्थ जोन कल्चर में किसी कार्यक्रम को देखने गए थे। वहां पर कुछ लोगों को भंगड़ा डालते देखा तो तभी भंगड़ा सीखने का ठान लिया। उन्होंने अपने पिता से बात की। पिता ने उस्ताद गरीबदास से बात की और गुरप्रीत को भंगड़ा सिखाने के लिए तैयार कर लिया। आठवीं क्लास की वार्षिक छुट्टियों में उन्होंने भंगड़े की एबीसीडी सीखी और कुछ दिनों में वे हुनरमंद की निगाहों में छा गए।