कोरोना काल में यूटी प्रशासन के एक आईएएस अधिकारी के घर 74 हजार के फूल-पौधे लगाने का मामला गरमा गया है। एडवाइजर मनोज परिदा से इस फिजूलखर्ची की शिकायत के बाद अब प्रशासन टेंडर को रद्द करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार प्रशासन ने इंजीनियरिंग विभाग को टेंडर की प्रक्रिया रद्द करने के आदेश दिए हैं।
कोरोना महामारी के बीच प्रशासन ने विभागों को खर्चे में कटौती करने के आदेश दिए हैं। ऐसे समय में एक आईएएस अधिकारी के घर 74 हजार के फूल-पौधे लगाए जाने का मामला अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। खबर प्रकाशित होने के बाद शहर में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना। सोशल मीडिया पर भी शहरवासियों की प्रतिक्रिया देखने को मिली।
प्रशासन की तरफ से की जा रही इस फिजूलखर्ची को लेकर आईटीआई चंडीगढ़ के कन्वीनर आरके गर्ग ने एडवाइजर मनोज परिदा को पत्र लिखकर इस टेंडर को रद्द करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया था कि जब प्रशासन वन महोत्सव के मद्देनजर पूरे शहर में कई तरह के पौधे फ्री में वितरित कर रहा है तो एक आईएएस के घर में फूल-पौधों के लिए 74 हजार रुपये क्यों खर्च किए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार चौतरफा किरकिरी के बाद संबंधित आईएएस अधिकारी ने इस टेंडर को वापस लेने के लिए इंजीनियरिंग विभाग को कहा है, जिसके बाद अब इसे रद्द करने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है।
सरकारी पैसे से 74 हजार में लगाए जाने थे घर में फूल-पौधे
यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से सेक्टर-7 के मकान नंबर-58 में लैंडस्कैपिंग वर्ग के लिए 74,194 का टेंडर जारी किया गया था। यह घर चंडीगढ़ प्रशासन के एक आईएएस अधिकारी का है, जो कि सेक्रेटरी रैंक के हैं। उन्हें मार्च के महीने में यह घर अलॉट हुआ है, जिसके बाद अब जाकर घर में फूल-पौधे लगाने का काम किया जाना था।
यह टेंडर 13 जुलाई को लगाया गया है, जिसकी बिड 20 जुलाई को खोली जानी थी। इस काम की कुल कीमत 74,194 रुपये लगाई गई है। प्रशासन की वेबसाइट पर अपलोड की गई जानकारी के अनुसार पहले इस काम की कीमत 81,944 लगाई गई थी, जिसे बाद में कम कर दिया गया। टेंडर के अनुसार घर में कई तरह के पौधे व फूल लगाने हैं।