सामरिक मामलों की विशेषज्ञ डॉ. आयशा सिद्धकी
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साल 2002 से हर साल हिंदुस्तान आना होता है। भारत में बदलाव आ रहा है। पहले की तुलना में अब घुटन ज्यादा महसूस होने लगी है। जो माहौल पाकिस्तान में था, अब वह हिंदुस्तान में दिखने लगा है। यह कहना है पाकिस्तान की सामरिक मामलों की विशेषज्ञ डा. आयशा सिद्दीका का।
वह शुक्रवार को चंडीगढ़ में थीं। उनके साथ पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार, विदेश मामलों की जानकार और अमर उजाला की कालमिस्ट मरियाना बाबर भी मौजूद रहीं। सेक्टर 36 स्थित कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में दोनों ने भारत-पाक से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच काफी बदलाव आए हैं। खासकर युवाओं में देशभक्ति मजबूत हुई हैं। दोनों मुल्क के युवा चाहते हैं कि वे देश के लिए कुछ करें।
जांच टीम आने से विश्वास बढ़ेगा, परिणाम का पता नहीं
डा. आयशा सिद्दीका का कहना है कि पठानकोट हमले की जांच के लिए पाक आफिसरों की टीम का भारत आना एक अच्छी शुरुआत है। दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ेगा। पहले आतंकी हमले के बाद दोनों देश के बीच बातचीत खत्म हो जाती थी। फिर बातचीत शुरू करने के लिए अमेरिका को बुलाना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
पठानकोट मसले पर भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि जांच के बाद परिणाम क्या निकलेगा, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन इतना तय है कि पाकिस्तान न तो अजहर को सौंपेगा और न ही दाऊद को। मरियाना का कहना है कि यह पाकिस्तान के टेस्ट है। जब भारत सुबूत सौंपेगा तो पाक उस पर क्या कार्रवाई करता है।
पहले मोदी से नफरत करते थे, लेकिन अब नहीं
मरियाना बाबर, पाकिस्तान
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मरियाना बाबर ने बताया कि गुजरात दंगों के वक्त पाक के लोग मोदी से नफरत करते थे। लेकिन नवाज शरीफ की पोती की शादी में जब मोदी अचानक पहुंचे तब से लोगों का नजरिया मोदी के प्रति बदला है। जब मोदी आए थे तो लोग काफी खुश थे। नरेंद मोदी ने जब नवाज की अम्मा से बात की तो पाक के लोग काफी भावुक हो गए थे
इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पठानकोट हमले के बाद मोदी ने पाक के खिलाफ ज्यादा शोर-शराबा नहीं किया, लेकिन यहां भी विपक्ष है। एक पठानकोट तो उन्होंने संभाल लिया, लेकिन और कितने पठानकोट संभालेंगे?
पाकिस्तानी सीरियल जमीन से जुड़े
मरियाना बाबर ने बताया कि भारत में पाकिस्तानी सीरियल इसलिए ज्यादा पसंद किए जाते हैं क्योंकि पाकिस्तानी चैनलों का अभी व्यापारीकरण नहीं हुआ है। सभी सीरियल जमीन से जुड़े हैं और भारतीय दर्शकों को हमेशा से पसंद आते रहेंगे। जबकि भारतीय चैनल पूरी तरह से व्यापारिक हो चुके हैं। पाकिस्तानी चैनल जिंदगी के सीरियल भारत के लोगों को काफी पसंद हैं।