सिटी ब्यूटीफुल के बढ़ते एयर ट्रैफिक को देखते हुए चंडीगढ़ एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है। इसके अपग्रेडेशन के लिए अब एयरफोर्स ने भी योजना तैयार कर ली है।
योजना यह है कि कोहरा हो या मौसम खराब, आसमान पर मंडराता विमान एयरपोर्ट पर लैंड जरूर करे। एयरफोर्स की योजना है कि एयरफील्ड का अपग्रेडेशन हो जाए।
चंडीगढ़ एयरपोर्ट के अपग्रेडेशन के लिए एयरफोर्स ने यहां इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम को चेंज करने की योजना बना ली है। अभी तक यहां एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया द्वारा लगाया गया कैट-1 आईएलएस ही है, जबकि एयरफोर्स इसको बदलकर कैट-2 आईएलएस लगाएगा। इसके संग ही एयरफील्ड लाइटिंग सिस्टम को चेंज कर दिया जाएगा।
यह करेगा एयरफोर्स
कैट-2 (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम)
इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम के माध्यम से साढ़े तीन सौ मीटर की विजिबिलिटी पर विमानों की लैंडिंग करवा सकता है। यह लेटरल और वर्टिकल रेडियो सिग्नल देता है।
डीएमई(डिस्टेंस मेजरिंग इंस्ट्रूमेंट)
यह इंस्ट्रूमेंट पायलट को स्लांट रेंज प्रदान करता है। यह जमीन से वास्तविक दूरी को बताता है। इसको रनवे के मिडवे में लगाया जाता है। जिससे कि यह दूरियों को ठीक से बता सके।
अप्रोच लाइटिंग सिस्टम
यह लाइटबार की सीरीज होती है। जिसको एयरपोर्ट के रनवे पर इंस्टाल करते हैं। इससे पायलट को रनवे पर विमान उतारते समय लाइटिंग स्पष्ट दिखाई दे।
पाथ इंडीकेटर लाइट्स
यह लाइट्स रनवे का पथ दर्शाने के लिए होती है। आमतौर पर रनवे पर यह तीन सौ मीटर की दूरी पर लगाई जाती है। यह लाइट्स ब्लिंक करती रहती हैं। जिससे पायलट आसानी से विमान उतार लेता है।
इसकी है जरूरत
आरवीआर यानी रनवे विजुअल रेंज। यह एविएशन मेट्रोलाजिकल इंस्ट्रूमेंट है। जिसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक रनवे पर कम से कम दो आरवीआर की आवश्यकता है।
एक आरवीआर रनवे के मिडिल में और एक शुरुआत में होना आवश्यक है। आरवीआर की न्यूनतम रीडिंग दो हजार मीटर और अधिकतम रीडिंग छह हजार मीटर होती है। चंडीगढ़ के रनवे पर एक भी आरवीआर नहीं है। आरवीआर की मौजूदगी से ही विजिबिलिटी का सही आंकलन हो सकता है।
चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए अपग्रेडेशन आवश्यक है। इसीलिए एयरफोर्स ने यह योजना तैयार की है।
-चंडीगढ़ एयरफोर्स