चंडीगढ़। ठंड बढ़ने के साथ ही अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। सबसे ज्यादा बच्चों की सेहत बिगड़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि खानपान और ठंड से बचाव में लापरवाही खतरनाक साबित हो रही है। जीएमएसएच- 16 समेत निजी अस्पतालों की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या ज्यादा देखी जा रही है। उनमें सर्दी, जुकाम, खांसी और बुखार के साथ ही लूज मोशन की शिकायत ज्यादा मिल रही है। जीएमएसएच- 16 की बालरोग विभाग की प्रमुख डॉ. सद्भावना का कहना है कि इस मौसम में बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है। ठंड के साथ ही ओपीडी में बच्चों की संख्या 100 से 120 तक पहुंच गई है।
ऐसे करें बच्चों की देखभाल-
- बच्चा एक साल से कम उम्र है तो उसे कई लेयर में गर्म कपड़ों से लपेट कर रखें।
- नवजात को मां की गोद में ज्यादा समय रखें।
- बच्चों को सफर के दौरान खिड़की के सामने न बैठाएं।
- खट्टे फल और दही का प्रयोग मां के लिए खतरनाक हो सकता है।
- खाने में दलिया, सूजी का उपमा, साबूदानी की खिचड़ी दें, क्योंकि यह आसानी से पच जाती है।
- कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम से बच्चों को दूर रखें।
- बच्चों को धूप निकलने के बाद नहलाएं।
- अस्थमा वाले बच्चों पर विशेष नजर रखें, दवाएं समय से दें।
- डायरिया में बच्चे को मां का दूध पिलाएं।
- ठंडे पानी और कोल्ड ड्रिंक से दूर रखें।
- धूल वाली जगहों पर न जाने दें।
- वायरल डायरिया में ओआरएस का घोल दें।
इसका रखें ध्यान
सिर पर लगती है ठंड
नवजात शिशु के सिर को हर समय ढककर रखना चाहिए, क्योंकि सिर का तापमान कम होता है तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। इसलिए बच्चे को ठंड से बचाने के लिए टोपी पहनाएं या सिर को किसी कपड़े से ढककर रखें।
तलवे का रखा विशेष ध्यान
नन्हे शिशु भले ही सारे समय बिस्तर पर लेटे रहते हैं और जमीन पर पैर नहीं रखते हैं फिर भी उन्हें तलवों से ठंड लग सकती है। इसलिए शिशु को मोजा पहनाना या पैरों की तरफ कपड़ा लपेटना जरूरी है।
नाक की गर्म तेल से मसाज करें
नाक के रास्ते भी ठंड शिशु के शरीर में प्रवेश कर सकती है। शिशु की नाक को बीच-बीच में गर्म हाथों से सिंकाई करें या गर्म तेल से मसाज करें। कोशिश करें कि कमरे का तापमान बहुत कम न हो। कपड़े से नाक को ना ढके इससे शिशु को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
हाथों में दस्ताने पहनाएं
शिशु को कई बार हाथों से भी ठंड लग जाती है। इसलिए शिशु को हाथों में मुलायम दस्ताने पहनाएं और पूरी बांह के कपड़े पहनाएं। रात में सोते समय बच्चे को दस्ताने ना पहनाएं।