पीजीआई के इंटरनल मेडिसिन के हीमेटोलॉजी यूनिट की ओर से वर्ल्ड क्रोनिक मायलोइड ल्यूकेमिया (सीएमएल) दिवस मनाया गया। इस मौके पर हजार से ज्यादा मरीज मौजूद रहे। इन मरीजों ने पीजीआई में हुए इलाज के अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों से कई सवाल भी पूछे गए जिनका डाक्टरों ने विस्तार से जवाब दिए।
करीब चार घंटे तक चले इस कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बातें निकलकर सामने आईं हैं, जो मरीजों के लिए काफी लाभदायक साबित होंगी। हीमेटोलॉजी यूनिट के विशेषज्ञों ने कहा कि सीएमएल कैंसर से पीड़ित मरीजों को डाक्टर जो दवा बताएं, उसे नियमित रूप से खाना चाहिए।
यदि मरीज दवाएं खाते हैं तो वे कैंसर को मात दे सकते हैं। पीजीआई में आने वाले 50 फीसदी मरीजों की दवाएं बंद हो चुकी हैं। जिन मरीजों ने दवा खाने में लापरवाही बरती है, उनका मर्ज कम होने के बजाय बढ़ता गया है और उसे काबू कर पाना मुश्किल हुआ है।
इस मौके पर पीजीआई के डायरेक्टर प्रो. जगतराम, पूर्व डायरेक्टर डा. बीके सिंह और पूर्व प्रो. बीके शर्मा मौजूद रहे। इस दौरान डाक्टर और मैक्स फाउंडेशन के अधिकारियों ने केक भी काटा।
कार्यक्रम में शामिल महिला अलका ने बताया कि उन्हें साल 2013 में पता चला था कि वे सीएमएल से पीड़ित हैं।
पीजीआई में उन्होंने डाक्टर पंकज मल्होत्रा को दिखाया। उन्होंने जांच के बाद दवा शुरू कर दी। एक भी दिन दवा खाने में गैप नहीं हुआ। फैमिली ने खूब सपोर्ट दिया। साल 2018 में डाक्टर ने दवा बंद कर दी। एक साल हो चुका है और बिना दवा के वह पूरी तरह से ठीक हैं।
सुनीता बंसल ने बताया कि वह साल 2013 में इस बीमारी से पीड़ित हुई थीं। पीजीआई में इलाज चला। अब दवा बंद हो चुकी है। सुनीता ने भी रेगुलर दवाई खाई और समय-समय पर टेस्ट भी करवाए।