चंडीगढ़। विश्व क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) दिवस पर बुधवार को जीएमएसएच- 16 में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ओपीडी में आए लोगों को इसकी जानकारी दी गई। 2020 की थीम ‘लिविंग वेल विद सीओपीडी-एवरीबडी, एवरीवेयर’ के बारे में अस्पताल के विशेषज्ञों ने अहम जानकारियां दीं। कोरोना काल में सीओपीडी के मरीजों पर ज्यादा खतरे की बात बताई गई और इससे बचाव के उपाय भी सुझाए गए। उनका कहना है कि कोरोना के कारण सांस के मरीजों को ज्यादा परेशानी हो रही है, ऐसी स्थिति में उन्हें ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
अस्थमा और सीओपीडी में अंतर
अस्थमा व श्वास रोग विभाग के सहायक के डॉ. हनी सैनी ने बताया कि क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों की एक ऐसी बीमारी है, जिसमें मरीज को सांस लेने में काफी दिक्कत होती है। आमतौर पर स्वस्थ मनुष्य के फेफड़े स्पंज के समान होते हैं और जब हम सांस के जरिए ऑक्सीजन अंदर लेते हैं तो वह ऑक्सीजन खून के अंदर घुल जाती है और कॉर्बन डाई ऑक्साइड बाहर निकल जाती है। लेकिन सीओपीडी एक ऐसी बीमारी है, जिसमें ऑक्सीजन शरीर के रक्त में नहीं घुल पाती है। इससे शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। यही कारण है कि मरीज की सांस फूलने लगती है और इसी गलतफहमी के कारण कई लोग सीओपीडी को अस्थमा की बीमारी समझने की भूल कर बैठते हैं जबकि अस्थमा में ऑक्सीजन नहीं घुल पाने जैसी समस्या नहीं होती है। अस्थमा फेफड़ों की ऐसी बीमारी होती है जिसके कारण व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है। यह फेफड़ों में वायुमार्ग से जुड़ी एक बीमारी है। अस्थमा होने पर श्वास नलियों में सूजन होकर श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है। इन वायु मार्गों यानी ब्रॉनकायल टयूब्स के माध्यम से हवा फेफड़ों के अंदर और बाहर जाती है और अस्थमा में यह वायुमार्ग सूजे हुए रहते हैं।
सीओपीडी से बचाव बेहद जरूरी
सीओपीडी भारत में हार्ट अटैक के बाद मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। मरीज जब पहली बार चिकित्सक के पास पहुंचता है, तब तक करीब 50 प्रतिशत फेफड़े खराब हो चुके होते हैं। डॉ. हनी सैनी ने बताया कि सीओपीडी धू्म्रपान करने वाले व्यक्ति में साधारणतया 40 साल की उम्र के बाद होता है। इसके लिए अपने घर की हवा साफ रखिए और हर तरह से धुएं और तेज गंध से दूर रहिए।
ये लक्षण हैं खतरनाक
- कामकाज के दौरान सांस की तकलीफ
- घबराहट
- सीने में जकड़न
- कफ के साथ लगातार खांसी
- बार-बार श्वसन संबंधी संक्रमण
- शक्ति की कमी
- अनायास वजन कम होना
- सूजे हुए टखने
- थकान
इसका रखें ध्यान
- बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें।
- अपने आप को पूरे दिन हाइड्रेटेड रखें और भरपूर मात्रा में पानी पीएं।
- धुएं के संपर्क में न आएं।
- घर में साफ-सफाई के दौरान मास्क लगाएं या वहां न रहें।
- भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
बचाव
- तंबाकू, ध्रमपान व शराब का सेवन न करें।
- स्पाइरोमेट्री से अपने फेफड़ों की जांच जरूर कराएं।
- तेज सर्दी से बचे।
- अपने वजन की निगरानी करें।
- पौष्टिक भोजन लें और व्यायाम करें।
- चिकित्सक की सलाह के अनुसार नियमित दवाइयां लें।