टैगोर थिएटर में सीमा विश्वास ने किया ‘स्त्री पत्र’ का मंचन
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‘आज लड़कियों का आत्महत्या करना नाटक माना जाता है। काली जब तक जीवित रही यश ना पा सकी, मरने के बाद भी उसका नाम नहीं हुआ।’
कुछ ऐसी ही कड़वी बातें शुक्रवार को टैगोर थिएटर के मंच पर सुनने को मिलीं। जहां बैंडिट क्वीन फिल्म में फूलन देवी का रोल करने वाली सीमा विश्वास के सोलो प्ले ‘स्त्री पत्र’ का मंचन हुआ। फिल्म जगत में ऐसी ही कई फिल्मों में अपनी पहचान बना चुकी सीमा विश्वास ने नाटक के बाद ऑडियंस के साथ बातचीत भी की।
नाटक के टाइटल की बात करें तो यह समाज के औरतों के प्रति रवैये से तंग आ चुकी एक पत्नी का अपने पति को लिखा पत्र है जो उसके सामने अपने विचारों के व्यक्त नहीं कर पाती। नाटक मृणाल और बिंदू नाम की दो औरतों के इर्द गिर्द घूमता है। जिसमें मृणाल मुख्य पात्र है जो अपने पति को पत्र लिखती है। उनके घर में एक लड़की आती है, जिससे परिवार वाले घर का पूरा काम करवाते हैं। जब वो थोड़ी बड़ी होती है तो उसकी एक पागल आदमी से शादी कर दी जाती है। जहां ससुराल जाकर बिंदू आत्महत्या कर लेती है। मृणाल को यह बात अंदर से अंदर खाती रहती है कि वह पढ़ी लिखी होकर भी बिंदू को बचा न पाई। घर की सीमा से बाहर जाने की उसे अनुमति नहीं थी। नाटक के अंत में वह अपने आप को इतना शक्तिशाली व मजबूत पाती है कि घर की सीमा तोड़कर अपना डर खत्म कर आगे बढ़ती है और अपने पति को कहती है कि अब मुझे तुम्हारी उस गली से कोई डर नहीं लगता, जो होना है सो होवे यही तो जीव की लगन है। जीओ और हमें भी जीने दो।
एक घंटे की सोलो परफारमेंस के बाद सीमा विश्वास ने दर्शकों से बात की और बताया कि शुरू में वह हिंदी शब्दों का उच्चारण भी सही ढंग से नहीं कर पाती थीं। सोचा कि अगर इसी लाइन में आगे जाना है तो अभी से इस पर काम करना शुरू कर देना चाहिए नहीं तो भविष्य में मुश्किल आएगी। सीमा विश्वास सफदर हाशमी जैसे नामीं थिएटर आर्टिस्ट के साथ भी काम कर चुकी हैं।
हुमस नाटक का आज होगा मंचन
आज सार्थक रंगमंच पटियाला के कलाकार हुमस नाटक पेश करेंगे। इस नाटक का निर्देशन लखा लहरी ने किया है जिसे किरपाल कजाक ने लिखा है। यह नाटक मानवीय रिश्तों के बीच की हुमस को दिखाता है। यह नाटक शाम 6:30 बजे टैगोर थिएटर में होगा, जिसकी एंट्री फ्री है।