युगपुरुष में दिखा ‘महात्मा’ का स्वरूप
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क्या आपको कभी यह जानने की उत्सुकता हुई है कि युवा मोहनदास गांधी के अभिप्राय और चरित्र को किसने रचा? अहिंसा, सत्य और धर्म विषयक उनके सिद्धांतों के पीछे किसका प्रभाव था? उनका रूपांतरण महात्मा में हुआ तब किसका योगदान था? महात्मा गांधी की इस बहिरंग यात्रा को उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शक संत राजचंद्र की प्रेरणा द्वारा उद्घाटित हुए दिखाया गया है नाटक युगपुरुष में। इसका मंचन मंगलवार को टैगोर थिएटर में किया गया।
इसमें इन दो महापुरुषों की गहन आत्मीयता दर्शाते हुए भारत के वर्षों के इतिहास के इस अनकहे नाटक ‘युगपुरुष-महात्मा के महात्मा’ को श्रीमद् राजचंद्र मिशन और धरमपुर के कलाकारों ने मंचित किया। श्रीमद् राजचंद्र की 140वीं जयंती वर्ष के मौके पर मिशन के संस्थापक गुरुदेव राकेश भाई की प्रेरणा से नाटक का निर्माण किया गया।
इस नाटक का लेखन उत्तम गढ़हा ने और निर्देशन राजेश जोशी ने किया। नाटक में दिखाया गया कि किस तरह श्रीमद् राजचंद्र से गांधीजी ने सत्य, अहिंसा को सीखा। श्रीमद् राजचंद्र एक संत, कवि और दार्शनिक थे। गांधीजी से उनकी पहली मुलाकात मुंबई में वर्ष 1891 में हुई थी, जब गांधीजी बैरिस्टर बनकर इंग्लैंड से लौटे थे। गांधीजी ने अपनी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ में भी उनका उल्लेख किया है।
नाटक के पात्र
महात्मा गांधी (वृद्ध) - नीलेश जोशी
महात्मा गांधी (युवा)- करन त्रिवेदी
श्रीमद् राजचंद्र - अनिल मेहता
डाया भाई- दिलीप
रेवाशंकर- श्याम
डॉ. पीटरसन- फ्लेवियस
कस्तूरबा- खुशबू
पोलक- रश्मि