एसवाईएल मुद्दे पर सोमवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल ने अपने अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात की।
खट्टर के नेतृत्व में 15 सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से हरियाणा को न्याय दिलाने की मांग की है। इस मुद्दे पर पंजाब के रुख को देश के संघीय ढांचे के खिलाफ बताते हुए खट्टर ने मामले में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने को कहा। वहीं, बादल ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि एसवाईएल मामले में वह ऐसी कोई सलाह न मानें जो जल बंटवारे के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करती हो।
मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा कि एसवाईएल मामले में पंजाब मनमानी कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा को उसका हक दिलाया है। पंजाब सरकार को फैसले का सम्मान करना चाहिए। जिससे देश का संघीय ढांचा सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि हरियाणा राष्ट्रपति के समक्ष न्याय मांगने आया है। राज्य में किसान जल संकट से जूझ रहे हैं।
खट्टर के नेतृत्व में 15 सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति मिला
एसवाईएल पर राष्ट्रपति से लगाई गुहार
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खट्टर के प्रतिनिधिमंडल में शामिल इनेलो के नेता अभय चौटाला ने धमकी देते हुए कहा कि अगर पंजाब ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान नहीं किया तो पार्टी कार्यकर्ता फरवरी माह में नहर खुदाई का काम शुरू कर देंगे। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु , शिक्षा मंत्री राम विलास शर्मा, राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक तंवर, किरण चौधरी, अशोक अरोरा शामिल थे।
हुड्डा ने भी पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय सर्वोपरि है। ऐसे में अगर पंजाब फैसले का सम्मान नहीं करता तो देश के संघीय ढांचे पर सवालिया निशान लग जाएगा। उन्होेंने कहा कि हरियाणा ने अपना हक हासिल करने के लिए वर्षों इंतजार किया है। ऐसे में राज्य पंजाब सरकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं करेगा।
गौरतलब है कि विवाद की शुरुआत तब हुई जब पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को मानने से इनकार कर दिया जिसमें सर्वोच्च अदालत ने एसवाईएल मामले में पंजाब सरकार को अंतरराज्यीय जल समझौते को एकतरफा तरीके से रद्द करने पर कड़ी फटकार लगाई।