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SYL के मुद्दे पर राष्ट्रपति से मिले सांसद-विधायक, ज्ञापन सौंपा

Sun, 20 Mar 2016 04:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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एसवाईएल के मुद्दे पर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपते हुए इनेलो सांसद - फोटो : अमर उजाला
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इनेलो के सांसदों और विधायकों ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर एसवाईएल के मुद्दे पर पंजाब सरकार की असंवैधानिक कार्रवाई के खिलाफ उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पंजाब सरकार को बर्खास्त किए जाने की मांग की गई है। इनेलो प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला ने किया। प्रतिनिधिमंडल ने जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हरियाणा में हुई हिंसा सहित पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच करवाने की भी मांग की।
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राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने के बाद अभय चौटाला ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि एसवाईएल का मामला सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन आने और अदालत की राय अपने विपरीत आने से आशंकित पंजाब ने एसवाईएल लैंड (ट्रांसफर ऑफ प्रोपराइटी राइट्स) बिल 2016 पारित कर दिया। इस बिल में एसवाईएल निर्माण के लिए पंजाब में जो भूमि अधिग्रहित की गई थी, उसे किसानों को वापिस लौटाने का प्रावधान है।

इनेलो नेता ने कहा कि इस विधेयक के पारित होते ही पंजाब में संवैधानिक ढांचा पूरी तरह से चरमरा गया है। पंजाब के सभी राजनीतिक नेताओं के प्रोत्साहन और समर्थन से किसानों द्वारा नहर के क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए न सिर्फ नहर किनारे लगे पेड़ों को काटकर गिराने से पर्यावरण की हानि हुई बल्कि मशीनों के प्रयोग से नहर को पाटने का काम भी किया गया। अब सर्वोच्च न्यायालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं।
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इनेलो नेताओं ने संविधान के प्रावधान अनुसार संघीय ढांचे पर प्रहार करने वाली पंजाब सरकार को बर्खास्त करने और पंजाब विधानसभा भंग करने का आग्रह करते हुए एसवाईएल को पूरा करने की जिम्मेदारी किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपे जाने और हरियाणा को उसके हिस्से का पानी दिलवाए जाने की मांग की। अभय चौटाला ने जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रदेश में घटी हिंसक घटनाओं का मामला भी राष्ट्रपति के समक्ष उठाया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की असफलता के कारण आंदोलन के दौरान 30 से ज्यादा लोगों की जान गई और हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि जाटों सहित अन्य जाति के लोगों को आरक्षण दिए जाने का समय-समय पर भरोसा दिया जाता रहा, लेकिन उसे पूरा नहीं किया गया। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक न्यायिक जांच आयोग का गठन किए जाने की मांग की।
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