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कैग ने खोली सरकार की पोल, 20 कंपनियां और करोड़ों का घाटा

Sun, 20 Mar 2016 04:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सीएम मनोहर लाल खट्टर - फोटो : amar ujala
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हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है, लेकिन कैग की रिपोर्ट ने सरकार की नीति को बेअसर साबित कर दिया है। वर्ष 2014-15 की रिपोर्ट में भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक ने प्रदेश के हरियाणा सरकार कई विभागों में अनियमितता, भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल खोली है।
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हालांकि, कैग ने जिस अवधि के लिए अपनी रिपोर्ट दी है, उस दौरान छह माह तक प्रदेश में हुड्डा की सरकार थी, लेकिन बाकी छह महीनों में भी प्रदेश सरकार के बोर्ड, निगम और कंपनियां घाटे में ही रहीं। हरियाणा की प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) महुआ पाल ने आडिट रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रख दी है।

रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र की 25 कंपनियां, जिनमें से 5 बंद पड़ी हैं, 3613 करोड़ के घाटे में हैं। इन कंपनियों में सरकार के 40984 करोड़ रुपये लगे हैं। इनके अलावा विभिन्न निगमों का कारगुजारी में लापरवाही ने भी करोड़ों की चपत सरकार को लगाई है। हरियाणा पर्यटन निगम ने वर्ष 2014-15 के दौरान 5.44 करोड़ रुपये का घाटा उठाया।
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निगम अपने परिसरों में अच्छी सेवाएं तो शुरू नहीं कर सका, उलटे अधिक दरों पर नियुक्तियां व ईंधन लागत बढ़ने से नुकसान में आ गया। उधर, हरियाणा कृषि उद्योग निगम को गेहूं के सही तरीके से भंडारण नहीं करने के चलते 7.89 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा है। लापरवाही का हाल हरियाणा राज्य भंडारण निगम में भी रहा। चावल की कस्टम मिलिंग के लिए मिलर्स को धान ही उपलब्ध नहीं कराया गया।

इसके चलते 19 मिलरों ने निगम को 1.64 लाख क्विंटल चावल डिलीवर नहीं किया, जिसके चलते उन मिलरों से 52 करोड़ रुपये की वसूली भी नहीं की जा सकी। वर्ष 2014-15 के दौरान हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम ने 21631 टन कोयले के लिए रेल भाड़ा, कस्टम ड्यूटी, स्टांप ड्यूटी और पोर्ट के भाड़े के तौर पर 4.71 करोड़ रुपये का भुगतान तो कर दिया, लेकिन निगम तक कोयला पहुंचा ही नहीं।

दूसरी ओर, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के विद्युत क्त्रस्य केंद्रों ने कोयले के मूल्य में अंतर के चलते अनलोडिंग और खपत के दौरान 75 करोड़ 39 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान कर दिया।

घाटा नहीं, ज्यादा वसूल लिया पैसा
घाटे में चल रहे निगमों के विपरीत प्रदेश सरकार के एक निगम में उलट कारनामा कर दिखाया। हरियाणा राज्य सड़क एवं पुल विकास निगम ने वर्ष 2014-15 के दौरान पांच स्टेट हाइवे को नेशनल हाईवे घोषित कर दिए जाने के बाद भी टोल टैक्स की वसूली जारी रखी। इस तरह इस निगम ने आम लोगों की जेब से 29 करोड़ 31 लाख रुपये ज्यादा निकाल लिए।
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