सतलुज यमुना लिंक नहर पर राजनीति गरमा गई है। मामले को लेकर अब पंजाब और हरियाणा सरकारों ने एक दूजे को चेतावनी दी है। मुद्दे को लेकर सीएम बादल ने कहा, ‘इस बात पर सभी सहमत हैं कि पंजाब के पास किसी को देने के लिए एक बूंद अतिरिक्त पानी नहीं है। पंजाब खुद पानी के गंभीर संकट से घिरा है।
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इसके मद्देनजर मैं इस सदन में एलान करता हूं कि नदी जल पर पंजाब केहक पर डटकर पहरा दिया जाएगा। राइपेरियन सिद्धांत को दरकिनार कर पंजाब को उसके हक से महरूम करने को किसी भी पक्ष की ओर से किया जाने वाला कोई भी फैसला मंजूर नहीं होगा। इस बारे में पंजाबियों और अकालियों ने बेशुमार कुर्बानियां दी हैं।
मैं घोषणा करता हूं कि पंजाब के हितों पर डाका डालने वाला कोई फैसला मुझे या अकाली-भाजपा सरकार को मंजूर नहीं होगा। एसवाईएल बनाने की न कोई जरूरत थी, न है और न ही बनने देंगे। पंजाब के हितों की रखवाली के इस मार्ग पर चलते हुए, जो भी सख्त कदम उठाने पड़े, उठाए जाएंगे।
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मैं सभी पंजाबियों को विश्वास दिलाता हूं कि पानी की रखवाली के लिए बड़ी से बड़ी कुर्बानी दूंगा। साथ ही पंजाबियों से विनती करता हूं कि गुटबाजी से ऊपर उठकर पानी की रखवाली के लिए कमर कस लें।’
'अपने हिस्से का पानी लेकर रहेंगे'
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पानी को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए एसवाईएल नहर को हरियाणा की जीवन रेखा बताया। उन्होंने कहा कि हम अपने हिस्से का पानी लेकर रहेंगे, चाहे कुछ भी करना पड़े। हम पंजाब के एसवाईएल बिल पर चुप नहीं बैठे हैं। पंजाब सरकार के रवैये के बारे में वे जल्द ही हरियाणा के सांसदों व विधायकों के साथ राष्ट्रपति और पीएम मोदी से मिलेंगे।
प्रस्ताव पास, किसी कीमत पर नहीं बनने देंगे एसवाईएल
प्रकाश सिंह बादल, पंजाब सीएम
- फोटो : amar ujala
पानी के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्टे के आदेश के बाद पंजाब विधानसभा ने एक अहम प्रस्ताव पास किया है। इसमें कहा गया है कि किसी भी कीमत पर एसवाईएल नहीं बनने देंगे। सीएम प्रकाश सिंह बादल ने शुक्रवार को यह प्रस्ताव सदन में पेश किया, जिसका विपक्ष ने समर्थन किया।
बादल ने कहा है कि नदी जल पर पहरा देने के संबंध में इस सदन में पिछले कुछ दिन से संजीदगी से चर्चा हुई है। वह एक प्रस्ताव भी लाए, जिसमें कहा गया कि राइपेरियन सिद्धांत का उल्लंघन कर रावी-ब्यास का पानी पंजाब से लेने के लिए एसवाईएल के निर्माण का फैसला जबरन पंजाबियों पर थोपने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सदन ने वह प्रस्ताव सर्व-सम्मति से पास किया था। उसके बाद एसवाईएल की जमीन किसानों को वापस करने के लिए लाया गया बिल भी सदन ने पास कर दिया। हरियाणा सरकार को एसवाईएल के संबंध में प्राप्त हुई 191.75 करोड़ की राशि भी लौटाई जा चुकी है।
वहीं, पंजाब विधानसभा की ओर से बिल पास करने की खबर सुनकर मालिकों ने जमीन का कब्जा भी ले लिया है जबकि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने स्टे के आदेश जारी किए हैं।
सुखबीर बादल के लिए जीत दिलाने का फॉर्मूला भी है और अभिशाप भी
- फोटो : BBC
सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी ने कहा कि पानी के मसले पर कांग्रेस सरकार के साथ है। यह मसला तब उठा जब केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में पंजाब के खिलाफ स्टैंड लिया। कांग्रेस ने एसवाईएल की जमीन वापसी का संशोधन किया, सरकार बिल लाई, कांग्रेस ने हिमायत की।
पर यह बात माननी पड़ेगी कि उसी दिन बिल पर राज्यपाल की मंजूरी नहीं ली जा सकी। चन्नी ने कहा कि कांग्रेस का स्टैंड साफ है, पानी की एक-एक बूंद बचाएंगे। कांग्रेस साथ चलेगी, सत्ताधारी पीएम नरेंद्र मोदी के घर पर धरना दें। मदन मोहन मित्तल ने इस पर एतराज जताया। साथ ही प्रस्ताव का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि 1982 में हरियाणा का चुनाव जीतने केलिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने पंजाब पर कुल्हाड़ी चलाई थी। इस बीच बादल ने टोका कि बड़ा फैसला लिया गया है, नुक्ताचीनी न करें कि हमने नहर नहीं बनने देनी। इसके बाद प्रस्ताव सर्व-सम्मति से पास कर दिया गया।
यह है प्रस्ताव
सदन की ओर से पास प्रस्ताव में लिखा है कि पंजाब इस समय पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहा है। सूबे केपास अपने दरियाई पानी में से किसी और को देने के लिए एक बूंद पानी नहीं है। इसके मद्देनजर सतलुज-यमुना लिंक नहर बनाने की न कभी कोई जरूरत थी और न आज है। यह सदन सर्वसम्मति से फैसला करता है कि एसवाईएल को किसी भी कीमत पर बनने नहीं देंगे।