एसवाईएल का मुद्दे पर पंजाब की राजनीति गरमा रही है। मामले को लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह और सांसद भगवंत मान में तीखी तकरार हुई। आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस और शिअद-भाजपा गठबंधन नदी जल के मसले पर सिर्फ राजनीति करते आए हैं। एसवाईएल के निर्माण और पंजाब का पानी दूसरे राज्यों में जाने से रोकने का जब सही वक्त था, इन्होंने कुछ नहीं किया।
बजट सत्र के दौरान शून्यकाल में मान ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर खुद को पंजाब के पानी का रखवाला बता रहे हैं, लेकिन एसवाईएल के निर्माण के समय वह भी तत्कालीन पीएम के स्वागत करने वालों में से थे। आठ अप्रैल 1982 को इंदिरा गांधी एसवाईएल निर्माण का उद्घाटन करने पहुंची थीं, तब कैप्टन उनके साथ खड़े थे। मान ने एक अखबार में स्वागत संबंधी विज्ञापन भी दिखाया।
उन्होंने कहा कि जब पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट एक्ट में सभी समझौते रद्द करने का मामला केंद्र गया तो कांग्रेस सरकार थी, लेकिन उसका विरोध करते हुए मामला प्रेसिडेंशियल रेफरेंस के लिए भेज दिया गया। नतीजन यह 12 साल लटकता रहा। अब भाजपा सरकार एसवाईएल के जल्द निर्माण को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है।
अकालियों की भूमिका लोकहित में नहीं थी
आप नेता सुखपाल खैरा ने कहा है कि एसवाईएल पर सीएम बादल और अकालियों की भूमिका भी लोक हित में नहीं थी। खैरा ने कहा कि यह कैप्टन अमरिंदर ही थे, जिन्होंने टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट एक्ट लाकर पानी समझौते रद्द किए।
शुरुआत में ही एसवाईएल निर्माण का किया था विरोध
कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि वह एसवाईएल नहर और नॉन राइपेरियन राज्यों के साथ पानी के बंटवारे के खिलाफ रहे हैं। उन्होंने एसवाईएल नहर की शुरुआत में ही इसका विरोध किया था और आज भी करते हैं।
आप सांसद भगवंत मान पर पलटवार करते हुए कैप्टन ने कहा कि मान को इस मुद्दे की गंभीरता और गहराई का अंदाजा ही नहीं है। इसीलिए वह ऐसी बातें कर रहे हैं। अगर एसवाईएल का निर्माण हो जाता तो सबसे ज्यादा प्रभावित संगरूर होता, जिसका वह प्रतिनिधित्व करते हैं।
कैप्टन ने कहा कि आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर गलत प्रचार कर रही है। उन्होंने शुरू से ही एसवाईएल के निर्माण का विरोध किया है, जब पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने 1982 में इसका निर्माण शुरू कराया था। उन्होंने इंदिरा को यह स्पष्ट किया था कि नहर का निर्माण ठीक नहीं है। उन्हें पंजाब के हित में अपनी निष्ठा के लिए बाहरी लोगों का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।
उन्होंने ही पंजाब का पानी बचाने के लिए सभी पुराने जल समझौते रद्द किए। अगर नहर के उद्घाटन समागम में वह मौजूद थे तो इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने इसका समर्थन किया था। वह तब पटियाला के सांसद थे और इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री, प्रोटोकॉल के मुताबिक समागम में उनकी मौजूदगी जरूरी थी। उस समय भी उन्होंने एसवाईएल के निर्माण पर असहमति जताई थी। उन्होंने कहा था कि यह नहर कैरियर कैनाल बन जाएगी।