हरियाणा निर्माण के आंदोलन के यौद्धा रहे स्वामी ओमानंद सरस्वती को लगता है मौजूदा कर्णधारों ने भुला दिया है। उनके नाम पर गुरूकुल झज्जर में बनने वाला पुरातत्व संग्रहालय करीब डेढ़ साल बाद भी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाया है।
सरकार के मंत्री हों या अधिकारी जता यही रहे हैं कि संग्रहालय के निर्माण में रोडा कोई नहीं है, पर ग्राउंड रिपोर्ट देखें तो हालात पोल खोल रहे हैं। जहां संग्रहालय प्रस्तावित है, बजट होने के बावजूद रजिस्ट्री नहीं हो रही है। रजिस्ट्री न होने से नक्शा तक नहीं बनाया जा सका। संग्रहालय में लगे कर्मियों का वेतन तक रूका है।
ये हैं हालात
10 अगस्त 2014 को तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय बनाने की घोषणा करते हुए स्वामी ओमानंद सरस्वती पुरातत्व संग्रहालय की आधारशिला रखी। सरकार को इसका भवन बनाना है, जिस पर 10-15 करोड़ रुपये की लागत प्रस्तावित है। गुरूकुल झज्जर के पास 20 एकड़ जमीन है।
सरकार द्वारा संग्राहलय बनाने की घोषणा के बाद गुरूकुल ने रेवाड़ी रोड के साथ लगती पांच एकड़ जमीन संग्राहलय के नाम कर दी। स्वामी ओमानंद सरस्वती पुरातत्व संग्रहालय निर्माण की प्रक्रिया इस पांच एकड़ जमीन की रजिस्ट्री संग्रहालय के नाम होने के बाद शुरू होनी है।
रजिस्ट्री खर्च के तौर पर समिति को 13.36 लाख रुपये सरकार की ओर से मिले हैं, यह खाते में पड़े हैं। पिछले डेढ़ साल में प्रशासन इस जमीन की रजिस्ट्री भी नहीं करा सका है। रजिस्ट्री के बाद संग्राहलय भवन का नक्शा बनना था और भवन के निर्माण के बाद गुरूकुल में पहले से चल रहे संग्राहलय का सामान यहां शिफ्ट होना है।
शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा जो कि समिति के सदस्य हैं, 50 लाख रुपये देने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन राशि अभी तक खाते में नहीं आयी। वित्त मंत्री आश्वासन दे चुके हैं कि सरकार का काम है, रजिस्ट्री फ्री में होगी, इसके आदेश प्रशासन को नहीं मिले हैं।
संग्रहालय में क्यूरेटर विरजानंद दैव करणी के साथ संग्राहलय में 6 कर्मचारी भी काम करते आ रहे हैं। कर्मी मई 2014 से काम कर रहे हैं, लेकिन तभी से उनका वेतन नहीं आया है। सरकार की ओर से सिर्फ क्यूरेटर विरजानंद का सिर्फ फरवरी, 2015 तक का वेतन ही जारी हुआ है। कर्मियों के लिए इस हालत में परिवार का पालन करना मुश्किल हो गया है।
हरियाणा निर्माण के पुरोधा रहे हैं स्वामी ओमानंद
गुरूकुल झज्जर को नया आयाम देने वाले स्वामी ओमानंद सरस्वती हरियाणा निर्माण के पुरोधा रहे हैं। हरियाणा को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के लिए चले आंदोलन में तो वे अग्रणी रहे ही साथ में नव हरियाणा के निर्माण के लिए वे सामाजिक कुरीतियों से भी लड़े।
हरियाणा जब पंजाब का हिस्सा था तो यहां के लोगों पर पंजाबी भाषा थोपने के प्रयास हुए। इसके विरोध में 1957 में हिंदी आंदोलन चला तो स्वामी ओमानंद अग्रणी पंक्ति में रहे और जेल भी गए। इसके बाद वे 1966-67 में प्रदेश में चले गौरक्षा आंदोलन में भी जेल गए।
संयुक्त पंजाब हरियाणा के समय हरियाणा के लिए जल युद्ध शुरू हुआ तो इसकी अगुवाई भी स्वामी ओमानंद व प्रो. शेर सिंह ने की थी। पूर्व उप प्रधानमंत्री चौ. देवीलाल भीआंदालेन से जुड़े थे। इसी आंदोलन की बदौलत हरियाणा अलग राज्य बना। स्वाामी ओमानंद ने 31 अक्तूबर, 1984 को बेरी में सर्वखाप बुलाकर सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया। उनके प्रयासों की बदौलत प्रदेश में शराबबंदी की घोषणा हुई।
संग्रहालय के निर्माण में देरी अवश्य है, कोई विवाद नहीं। रजिस्ट्री या अन्य काम शुरू होने में जो थोड़ी बहुत दिक्कत है, उसे संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर दूर करने का प्रयास हो रहा है। जमीन की रजिस्ट्री के लिए भी संबंधित अधिकारियों को बोला गया है।
-अनीता यादव, डीसी
संग्रहालय के लिए मैंने 50 लाख रुपये देने की घोषणा की थी। बजट जारी हो चुका है। फिलहाल चुनाव आचार संहिता लागू है। पंचायत चुनाव के बाद वो इस पर कार्रवाई करेंगे।
-रामबिलास शर्मा, शिक्षा मंत्री
संग्राहलय के निर्माण की प्रक्रिया कहां तक पहुंची, वो अनभिज्ञ हैं। अमर उजाला का धन्यवाद करते हैं कि तो कि इस मुद्दे पर ध्यान दिलाया। संबंधित विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर जानकारी लेंगे। संग्रहालय जरूरबनेगा और जल्द काम शुरू कराने का प्रयास करेंगे।
-ओमप्रकाश धनखड़, कृषि मंत्री