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2015 में 8 हजार ने देखा स्वामी ओमानंद का पुरातत्व संग्रहालय

Mon, 11 Jan 2016 01:47 PM IST
जितेंद्र सहारण/अमर उजाला, झज्जर
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स्वामी ओमानंद सरस्वती ने देश भर में घूमकर प्राचीन धरोहर के तौर पर भारतीय संस्कृति का अनमोल खजाना संग्रहित किया था। इसे रेवाड़ी रोड स्थित गुरूकुल झज्जर में वर्ष 1961 में बने संग्रहालय में संजोया गया है और यह लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। वर्ष 2015 में ही करीब 8 हजार व्यक्ति इसका भ्रमण कर चुके हैं।
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कांग्रेस सरकार ने इस संग्राहलय की महता को समझा और 10 अगस्त 2014 को तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय बनाने की घोषणा करते हुए स्वामी ओमानंद सरस्वती पुरातत्व संग्रहालय की आधारशिला रखी।

...इसलिए बढ़ी संग्राहलय की महता
स्वामी ओमानंद सरस्वती पुरातत्व संग्रहालय में विद्या आर्य सभा द्वारा वर्षों से संजोकर रखी गई पुरातत्व कलाकृतियों और वस्तुओं को रखा जाना है। साथ ही संग्रहालय पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोधार्थी शोध भी कर सकेंगे।
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यहां पुरातत्व की वस्तुओं में रेवाड़ी, हांसी और हिसार से मिले सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े लगभग 400 तांबे व लोहे के पुराने हथियार, मौर्य काल से लेकर ब्रिटिश काल तक के लगभग डेढ़ लाख सिक्के, पहली शताब्दी से लेकर 16वीं शताब्दी तक की लगभग 10 हजार देवी-देवताओं की पत्थर की मूर्तियां रखी जाएंगी।

इसके अलावा 320वीं से लेकर 520वीं सदी की लगभग 20 हजार पक्की मिट्टी की मूर्तियां, खिलौने व अन्य कृतियां, नौरंगाबाद, भिवानी और अग्रोहा से मिले लगभग 20 हजार से ज्यादा मनके, कीमती पत्थर व शंख, 16वीं सदी की लगभग 800 पांडुलिपियां, जिनमें से कुछ ताड़पत्र पर भी लिखी गई हैं और 10वीं शताब्दी के लगभग 500 मुद्रांक व शिलालेख शामिल हैं। कई देशों की मुद्राएं भी यहां रखी हुई हैं।

सीएम हैं अध्यक्ष, डीसी कोषाध्यक्ष
झज्जर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय बनाने के लिए सरकार की घोषणा के बाद स्वामी ओमानंद सरस्वती पुरातत्व संग्रहालय समिति का गठन किया गया। संग्रहालय के निर्माण व देख रेख की जिम्मेदारी इस समिति को निभानी है। समिति के अध्यक्ष सीएम है, जबकि डीसी कोषाध्यक्ष। शिक्षामंत्री, वित्तमंत्री व पुरातत्व विभाग के डायरेक्टर, गुरूकुल झज्जर के आचार्य विजयपाल, गुरूकुल संग्राहलय के निदेशक कम संग्रहपाल विरजानंद दैव करणी व सरकार के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस समिति में शामिल हैं।

स्वामी ओमानंद ने दिया गुरूकुल को नया आयाम
झज्जर गुरुकुल की स्थापना 16 मई 1915 को पंडित बिशंभर दत्त द्वारा की गई थी। उनके अस्वस्थ होने के कारण यह गुरुकुल दो मार्च 1924 से प्रारंभ हो सका। 1924 से 1940 तक स्वामी ब्रह्मानंद ने इसका संचालन किया। इस दौरान स्वामी परमानंद का सहयोग रहा। बाद में दोनों के अति वृद्ध होने के कारण गुरुकुल को प्राय बंद करने की स्थिति गई। मूल रूप से दिल्ली के नरेला के रहने वाले स्वामी ओमानंद वर्ष 1942 में गुरूकुल झज्जर आए।

इससे पहले उन्होंने अपनी 250 बीघा पुस्तैनी जमीन कन्या गुरूकुल को दान दे दी थी। वर्ष 2003 तक गुरूकुल झजजर को संभाला और नए आयाम तक पहुंचाया। गुरूकुल के पास वर्ष 1916 में 138 बीघा जमीन थी। स्वामी ओमानंद के प्रयासों से आज गुरुकुल के पास 450 बीघा जमीन है। यहां संग्रहालय, औषद्यालय, लाइब्रेरी, गौशाला आदि हैं।

कई बार बैठक, खेमका भी कर चुके हैं भ्रमण
स्वामी ओमानंद सरस्वती पुरातत्व संग्रहालय निर्माण में सरकार ने रूची तो दिखाई, लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ रही है। इसको चंडीगढ़ में दो बार बैठकें हो चुकी हैं। भाजपा की सरकार बनने के बाद पुरातत्व विभाग के डायरेक्टर अशोक खेमका 27 जुलाई 015 को अपनी टीम के साथ मौके का मुआयना कर चुके हैं। उन्होनें झज्जर के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भी संग्राहल के निर्माण को लेकर चर्चा की। इसके अलावा सरकार संग्राहलय समिति, इसमें रखे जाने वाले सामान, संचालन की विधि आदि पर फैसले ले चुकी है।

गुरूकुल के प्राचीन संग्रहालय में मौजूद सामग्री पर विद्यार्थी एमए एमफिल, पीएचडी करते हैं। गुरूकुल की ओर से इसके लिए कोई खर्च नहीं लिया जाता। सारी सुविधाएं फ्री में मुहैया कराते हैं। संग्रहालय जनता के दान से चलता है। जो भी व्यक्ति भ्रमण के लिए आते हैं, उनसे कोई टिकट नहीं ली जाती। पूर्ववर्ती सरकार में स्वामी ओमानंद सरस्वती पुरातत्व संग्रहालय की आधारशिला रखने के बाद उम्मीद बंधी थी कि गुरूकुल को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिलेगी, सुविधाएं बढ़ेगी। लेकिन फिलहाल सारा प्रोजक्ट अधर में लटका है।
-विरजानंद दैव करणी, क्यूरेटर संग्रहालय

स्वामी ओमानंद सरस्वती पुरातत्व संग्रहालय झज्जर के लिए बड़ा अहम है। कांग्रेस सरकार ने इसमें रखे पुरातत्व के सामान कर महता को समझ कर इसे एमडीयू में तब्दील करने की योजना बनाई थी, लेकिन ये झज्जर के सम्मान का प्रतीक है और इसे यहीं पर नया रूप देने पर कदम उठाए गए। कर्मियों के वेतन आदि की व्यवस्था कांग्रेस राज में कर दी गई थी। भाजपा सरकार संग्रहालय के निर्माण में कदम बढ़ाए, इसे बदले की भावना से दूर रखा जाए। हम इस मामले में संबंधित अधिकारियों से बात करेंगे, जरूरत पड़ी तो मामले को विधानसभा में भी उठाया जाएगा।
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-गीता भुक्कल, विधायक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री
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