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स्वच्छता रैंकिंग 2024: पहली बार केंद्र ने नहीं बताए नंबर, नाै साल बाद चंडीगढ़ की कैटेगरी भी बदली; उठे कई सवाल

Fri, 18 Jul 2025 03:53 PM IST
निवेदिता वर्मा प्रवीण राय, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

इस बार चंडीगढ़ को स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 की सुपर लीग की श्रेणी में रखा गया था। इसमें 23 ऐसे शहरों को रखा गया है, जो अब तक हुए सर्वेक्षणों में पहले, दूसरे या तीसरे स्थान पर रहे हैं। इस बार चंडीगढ़ को 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों की कैटेगरी में रखा गया है जबकि पिछले 9 वर्षों से यह 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में शामिल था। 
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चंडीगढ़ शहर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 के नतीजों ने इस बार चंडीगढ़ को भले ही दूसरी रैंक दिला दी लेकिन इसके पीछे की प्रक्रिया और आंकड़ों में बदलाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 
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केंद्र सरकार ने इस बार न तो शहरों को मिले कुल अंक जारी किए और न ही यह स्पष्ट किया कि किस आधार पर 9 साल बाद चंडीगढ़ की कैटेगरी बदल दी गई। आंकड़ों की इस हेरफेर के चलते न सिर्फ चंडीगढ़ का मुकाबला इंदौर और सूरत जैसे बड़े शहरों के बजाय छोटे शहरों से हुआ बल्कि कई अन्य रेटिंग कैटेगरी में भी चंडीगढ़ पिछड़ता नजर आया।

कैटेगरी बदलते ही न सिर्फ चंडीगढ़ का मुकाबला इंदौर और सूरत जैसे बड़े शहरों के बजाय अब नोएडा, मैसूर, गांधीनगर, गुंटूर और उज्जैन जैसे अपेक्षाकृत छोटे शहरों से हुआ बल्कि इससे इसकी वास्तविक स्थिति की तुलना करना भी मुश्किल हो गया है। शहर के कई लोगों का कहना है कि यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं है बल्कि एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है जिससे चंडीगढ़ की रैंकिंग बेहतर दिखे। नगर निगम के एक पूर्व अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर चंडीगढ़ को पुराने वर्ग में ही रखा जाता तो इस बार भी वह शायद टॉप 10 में भी नहीं आ पाता। बता दें कि गार्बेज फ्री सिटी में भी चंडीगढ़ को 7 में से 3 स्टार मिला है।

क्या बदला इस बार?

  • पिछले वर्षों की तरह इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में शहरों को 12,500 में से अंक तो दिए गए लेकिन केंद्र सरकार ने पहली बार यह खुलासा नहीं किया कि किन शहरों को कितने अंक मिले। इससे यह जानना मुश्किल हो गया है कि चंडीगढ़ को कुल 12,500 में से कितने अंक मिले और उसका प्रदर्शन इंदौर या सूरत जैसे शहरों के मुकाबले कैसा रहा। हालांकि, मेयर बबला ने कहा कि चंडीगढ़ को 88 फीसदी अंक मिले हैं।
  • यही नहीं, चंडीगढ़ को 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों की कैटेगरी में डालकर जो दूसरी रैंक दी गई है, वह भी कई लोगों को मैनेज्ड लग रही है। जब 2011 की जनगणना में ही चंडीगढ़ की जनसंख्या 10.55 लाख थी, तो फिर 2024 में उसे 10 लाख से कम की श्रेणी में कैसे रखा गया। सिटी फोरम ऑफ रेजिडेंट्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के संयोजक विनोद वशिष्ठ का कहना है कि चंडीगढ़ ने खुद को स्वच्छ घोषित करने के लिए धोखा दिया। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ 5 स्टार या 7-स्टार कचरा मुक्त शहरों (जीएफसी) की स्टार रैंकिंग में अपग्रेड करने में विफल रहा है।

भाजपा की मेयर को इनाम देने के लिए कैटेगरी बदलीः डिप्टी मेयर

डिप्टी मेयर तरुणा मेहता ने भी इस पर सवाल उठाया। कहा कि पहले जहां चंडीगढ़ का मुकाबला इंदौर, सूरत जैसे शहरों से था, अब हमें छोटे शहरों की सूची में डाल दिया गया। ऐसा लगता है कि केंद्र में भाजपा की सरकार होने के बाद बस शहर को इनाम दिलाने के लिए इस श्रेणी में डाला गया है। ऐसे में इनाम पाने से बेहतर है कि सही श्रेणी चंडीगढ़ को रखकर यहां के काम को बेहतर किया जाता।

नगर आयुक्त से सवाल

सवालः चंडीगढ़ को 3 से 10 लाख आबादी में क्यों रखा गया, जबकि जनसंख्या रिपोर्ट में हम 10 लाख से ज्यादा है
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जवाबः
आबादी के हिसाब से शहरों की श्रेणी तय केंद्र सरकार और मंत्रालय की तरफ से किया जाता है। इसमें स्थानीय नगर निगम की कोई भूमिका नहीं होती है।
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सवालः क्या इसमें नगर निगम की तरफ से कोई सुझाव नहीं जाता?
जवाबः
इसमें केंद्र के स्तर पर ही सबकुछ होता है। स्थानीय निकाय की कोई भूमिका नहीं होती है। यह हो सकता है कि यहां की आबादी 10 लाख के करीब थी तो हमें उस श्रेणी में डाल दिया गया हो।
 
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