स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में चंडीगढ़ को सिर्फ एक पायदान की उछाल मिली है लेकिन अगर डड्डूमाजरा का डंपिंग ग्राउंड नहीं होता तो चंडीगढ़ इस वर्ष चौथे नंबर पर होता।
स्वच्छ सर्वेक्षण में चार वर्गों में नंबर दिए गए हैं। तीन में शहर के काफी अच्छे नंबर हैं। टॉप-10 में शामिल कई शहरों से ज्यादा नंबर है लेकिन एक वर्ग 'गार्बेज फ्री सिटी' का है, जिसमें शहर बुरी तरह से पिछड़ा है। टॉप-14 में सिर्फ चंडीगढ़ ही है, जिसके इस वर्ग में सिर्फ 725 नंबर आए।
स्वच्छ सर्वेक्षण में इस बार सभी शहरों को 9500 में से नंबर दिए गए। मध्य प्रदेश के इंदौर और गुजरात के सूरत का स्कोर लगभग बराबर रहा। इंदौर का ओवरऑल स्कोर 9348.4 और सूरत का 9348.2 रहा। चंडीगढ़ का ओवरऑल स्कोर 8541.1 रहा है। चारों वर्गों के नंबरों को मिलाकर ओवरऑल स्कोर तय किया गया है।
पहला वर्ग, सेवाओं के स्तर की प्रगति (एसएलपी) के लिए 4830 में से नंबर दिए गए, कचरा मुक्त शहर (जीएफसी) के लिए 1375, खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) के लिए 1125 और जनता की प्रतिक्रिया (सिटीजन वॉइस) के वर्ग में 2170 में से नंबर दिए गए।
कचरा मुक्त शहर के नंबर को छोड़ दें तो अन्य तीनों में चंडीगढ़ के नंबर काफी अच्छे हैं। टॉप-3 में आए शहरों के कचरा मुक्त शहर के वर्ग में 1375 में से पूरे 1375 नंबर आए हैं। चौथे नंबर पर आए शहर से लेकर 14वें नंबर पर आए शहरों के भी इस वर्ग में 1375 में से 1175 आए हैं।
एकमात्र चंडीगढ़ ही ऐसा है, जिसके 1375 में से सिर्फ 725 नंबर आए हैं। डंपिंग ग्राउंड होने की वजह से बाकी नंबर काटे गए हैं। अगर डंपिंग ग्राउंड नहीं होता तो चंडीगढ़ को कम से कम 1175 और अधिकतम 1375 नंबर मिलते। इन दोनों ही स्थिति में चंडीगढ़ का ओवरऑल स्कोर 8991.1 या 9191.1 होता। इन दोनों में से कोई भी स्कोर आता तो चंडीगढ़ सीधे चौथे नंबर पर पहुंच जाता, क्योंकि अन्य शहरों के इससे कम नंबर हैं।
सिर्फ चंडीगढ़ ही नहीं, कई शहर कूड़े की वजह से पिछड़े
स्वच्छ सर्वेक्षण के आंकड़ों को खंगालने पर एक बात स्पष्ट है कि जो-जो शहर रैंकिंग में पिछड़े हैं, उसके पीछे मुख्य कारण कूड़ा और जनता की कम भागीदारी है। कई शहरों के अन्य दो वर्गों में ठीक नंबर हैं लेकिन कचरा मुक्त शहर और जनता की प्रतिक्रिया के वर्ग में कम नंबर होने की वजह से रैंकिंग में पीछे हो गए। डंपिंग ग्राउंड होने का नुकसान चंडीगढ़ को कितना उठाना पड़ा है, इस बात का अंदाजा इसी से लगााया जा सकता है कि रैंकिंग में 17वें नंबर पर आए आंध्र प्रदेश के गुंटूर के भी अंक कचरा मुक्त शहर के वर्ग में चंडीगढ़ से ज्यादा है। उन्हें 1175 अंक मिले हैं।
आंकड़ों के खेल को समय रहते समझ गया निगम तो बच गई लाज
स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 के संकेतकों ने घर-घर से लिए गए कचरे को अलग-अलग करने, जीरो अपशिष्ट कार्यक्रम, दिव्यांग-अनुकूल शौचालय, बेहतर प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और बैकलेन स्वच्छता से संबंधित मापदंडों पर ध्यान केंद्रित किया हैं। नगर निगम पिछले कुछ वर्षों से इनमें अच्छा कार्य कर रहा है। बैकलेन की सफाई के लिए विशेष टेंडर भी किया गया, जिसका असर भी नजर आ रहा है और अधिकतर बैकलेन अब साफ-सुथरे हैं।
केंद्र ने 'मैनहोल' को 'मशीन होल' में बदलने के बारे में जोर देते हुए सफाई मित्र सुरक्षा को इस बार के रैंकिंग में काफी प्राथमिकता दी थी। अंक दोगुने कर दिए गए थे। चंडीगढ़ में मशीनों से ही सफाई होती है। साथ ही अंक दोगुने होने की जानकारी मिलने पर निगम ने इस पर जोरशोर से काम किया।
केंद्र से आई टीम को अपने कई केंद्रों का दौरा कराया, उन्हें मशीनें दिखाईं और कर्मचारियों के लिए कई कदम उठाए, जिससे चंडीगढ़ को सफाई मित्र सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला और ओवरऑल स्कोर भी सुधरा।
विभिन्न वर्गों में नंबर
कुल हासिल अंक कुल अंक
सेवाओं के स्तर की प्रगति (एसएलपी) 4645.3 4830
कचरा मुक्त शहर (जीएफसी) 725 1375
खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) 1125 1125
जनता की प्रतिक्रिया (सिटीजन वॉइस) 2045.8 2170