स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 में चंडीगढ़ दूसरे स्थान से फिसलकर 11वें स्थान पर पहुंच गया है। ऐसे में निगम की काफी किरकिरी हो रही है।
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निगम के अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल चंडीगढ़ की प्रतियोगिता 10 लाख जनसंख्या वाले 73 शहरों से थी, लेकिन इस बार मुकाबला एक लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले 500 शहरों से हुआ है। स्वच्छ सर्वेक्षण में चंडीगढ़ को 2000 में से 1701 अंक मिले हैं, जबकि पिछले साल के सर्वेक्षण में 1716 अंक हासिल हुए थे। सर्वेक्षण में मोहाली की रैंकिंग 121वीं और पंचकूला की 211वीं है।
हर माह 10 करोड़ रुपये खर्च
शहर की सफाई व्यवस्था पर हर माह निगम का करीब 10 करोड़ रुपये खर्च आता है। ज्यादा खर्च दक्षिणी सेक्टरों की सफाई पर होता है। निगम ने इस साल जनवरी में ही मैकेनिकल स्वीपिंग के काम के लिए टेंडर अलॉट किया है, जिस पर ही निगम का हर माह पौने चार करोड़ का खर्च आ रहा है।
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तैयारी तो खूब की थी
चंडीगढ़ शहर
स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर परिणाम के लिए निगम ने खूब तैयारी की थी। दक्षिणी सेक्टर में मैकेनिकल स्वीपिंग से सफाई का काम शुरू करवाने के लिए कंपनी को टेंडर अलॉट किया गया है। नए टेंडर से निगम का एक करोड़ रुपये का हर माह का खर्च भी बढ़ गया है। खुले में शौच से मुक्त सिटी घोषित करवाने के लिए निगम ने स्लम कॉलोनियों के आसपास 419 रीलोकेटिड टायलेट का निर्माण किया, जिस पर एक करोड़ 40 लाख का खर्च हुआ है।
यही नहीं निगम ने दिल्ली से किराए पर 90 दिन के लिए मोबाइल टायलेट भी मंगवाए थे, जिसका 23 लाख रुपये भुगतान किया गया था। हाल ही में निगम ने सफाई कर्मचारियों की भर्ती भी निकाली है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत डोर टू डोर गारबेज इकट्ठा करने के लिए हाल ही में निगम ने 5 लाख नए डस्टबिन खरीदे हैं, जो कि 5 जून से शहरवासियों को बांटे जाएंगे।
जहां ज्यादा जरूरत, वहां कम मेहनत
सफाई व्यवस्था के मामले में चंडीगढ़ के दो भागों में बंटा है। एक गंदा और एक ठीक ठाक। निगम सिर्फ वीआईपी सेक्टरों को दिखाकर ही अवार्ड लेने का प्रयास करता है, जबकि कॉलोनियां, गांव और दक्षिणी सेक्टरों की सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। निगम का ध्यान भी सिर्फ उतरी सेक्टरों की तरफ ही ज्यादा रहता है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि निगम के पास इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है।
कॉलोनियों और गांवों के हालात नहीं सुधरे
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कॉलोनियों और गांवों की हालत सफाई के मामले में खस्ता है। धनास में सफाई कर्मचारी हैं, लेकिन मिल्क कॉलोनी को ग्वालों के पशुओं के कारण गोबर के ढेरों से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। सेक्टर-25 की कच्ची कॉलोनी के कारण जगह-जगह कूड़े के ढेर लग रहे हैं।
मनीमाजरा, बापूधाम इंदिरा कॉलोनी और मौलीजागरां में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण गंदगी बनी रहती है। चंडीगढ़ के प्रवेश द्वार में भी जगह-जगह गंदगी अटी रहती है। हल्लोमाजरा की हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं है॥। सेक्टर-26 की ग्रेन मार्केट की हालत खस्ता है। यहां पर ग्राहकों को हमेशा ही दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। मंडियों का कूड़ा अगले दिन काफी देरी से उठता है।
450 डस्टबिन हैं शहर में
इस समय पूरे शहर में 450 डस्टबिन हैं, जहां पर कूड़ा फेंका जाता है। कई एरिया में डस्टबिन के बाहर भी कूड़ा गिरा रहता है। यहां से कूड़ा ले जाने वाली ट्रालियां पीछे से खुली होती हैं। 100 से ज्यादा डस्टबीन टूटे हुए हैं।
गारबेज प्लांट हुआ फेल
निगम के अनुसार डड्डूमाजरा में जेपी का गारबेज प्लांट ठीक तरह से नहीं चल रहा है। जब कूड़ा प्रोसेस होता है तो पूरे शहर में दुर्गंध होती है। डंपिंग ग्राउंड के कारण डड्डूमाजरा के 50 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को कोई न कोई बीमारी है।
संवाद कार्यक्रम में बोलीं मेयर आशा जसवाल
- फोटो : अमर उजाला
शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर भाजपा के अपने नेता भी सवाल उठा रहे हैं। भाजपा के मंडल अध्यक्ष संजीव वर्मा का कहना है कि यह सच है कि चंडीगढ़ की सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है उनका कहना है कि यह सिर्फ ठेके पर जो सफाई कर्मचारी हटाए गए हैं। इसका नतीजा है। जो मशीनें लगाई गई है उनसे ठीक तरह से सफाई नहीं होती। निगम में ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार फैला हुआ है।
चंडीगढ़ ने देशभर में यूटी और राजधानी में सबसे साफ सुथरा होने का अवार्ड प्राप्त किया है। यह नगर निगम के लिए सम्मान है बाकी सुधार की तो हमेशा ही गुंजाइश रहती है।
बी पुरूषार्था, निगम कमिश्नर
चंडीगढ़ का पिछड़ना अफसोसजनक है। कांग्रेस मेयर के समय चंडीगढ़ को नंबर-1 का भी अवार्ड मिल चुका है। प्रशासन और निगम को चाहिए जहां-जहां पर खामियां हैं, उन्हें दूर किया जाए।
पवन बंसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेसी नेता
पूरे शहर में सफाई कर्मचारी काम कर रहे हैं। मार्केट के व्यापारी जब गंदगी डालते हैं तो सेनिटेशन इंस्पेक्टर उनका चालान काटते हैं। जब स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम शहर में आई थी तो इन व्यापारियों ने ही शिकायत कर दी कि सफाई नहीं होती है।
कृष्ण चड्ढा, अध्यक्ष, सफाई कर्मचारी यूनियन
स्वच्छ सर्वेक्षण में जो साफ-सफाई की कैटेगरी थी, उसमें चंडीगढ़ टॉप पर रहा है, लेकिन ऑल ओवर कैटेगरी में रैंकिंग गिरी है। खामियों को दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। डोर टू डोर गारबेज इकट्ठा करने वालों से जल्द बैठक की जाएगी।
आशा जसवाल, मेयर