लोगों को स्वच्छता अभियान के साथ जोड़ने वाले नगर निगम के अपने कार्यालय की हालत काफी खस्ता है। पब्लिक टायलेट का भी बुरा हाल है। यहां कोई ऐसा टायलेट नहीं है जो साफ सुथरा हो। निगम के प्रवेश द्वार के साथ बने टायलेट से लगातार दुर्गंध आती है इसके साथ ही निगम के बेसमेंट में भी फाइलें खुली पड़ी हैं। यहां कर्मचारी काम कर रहे हैं, जबकि बेसमेंट पार्किंग के लिए रिजर्व रखी गई है।
लेकिन अब कर्मचारी अपने कार्यालय बनाकर यहां काम कर रहे हैं। बेसमेंट में जहां गंदगी है। वहीं यहां पर दम घुटता है। सरकारी अलमारियां बरामदे में ही पड़ी हैं। निगम कार्यालय में तार खुले में ही हैं। मेयर ऑफिस के बाहर भी तार लटक रहे हैं। निगम में अतिक्रमण हटाओ दस्ते के विंग के साथ जो वाटर कूलर है, वह काफी लंबे समय से खाली है। ऐसे में आने वाले लोगों के लिए पीने के पानी कोई सुविधा नहीं है। यहां डस्टबिन काफी गंदे हैं। जबकि पूरे शहर की सफाई की जिम्मेदारी और डस्टबिन उपलब्ध कराने का काम निगम का ही है। मालूम हो कि शहर को स्मार्ट सिटी बनाने का भी अहम काम नगर निगम के पास है।
लोगों को भेजे जाते है वायलेशन के नोटिस
शहर में इस समय बेसमेंट में अगर कोई कार्यालय बनाकर काम करता है तो प्रशासन की ओर से वायलेशन के नोटिस भेजे जाते है और निगम भी फायर के नोटिस भेजता है। लेकिन नगर निगम बेसमेंट में खुद कार्यालय चलाकर वायलेशन कर रहा है।
बेसमेंट में कार्यालय नहीं चलेंगे
मेयर अरुण सूद का कहना है कि निगम कार्यालय के ऊपर तीन नई मंजिलों का निर्माण हो रहा है। इस साल अक्तूबर तक इसका काम पूरा हो जाएगा। जिसके बाद बेसमेंट में कार्यालय नहीं चलेंगे। कर्मचारियों के बैठने के लिए काफी जगह हो जाएगी। इससे सफाई व्यवस्था भी सुधरेगी और अलमारियां रखने के लिए भी पूरी जगह मिल जाएगी।
जान दांव पर लगाकर कर रहे काम
निगम की इमारत के बाहर कंटिलिवर का पलस्तर करने में दो कर्मचारी जुटे रहे जिनमें एक महिला कर्मी थी। लेकिन इन कर्मचारियों के लिए कोई सुरक्षा के बंदोबस्त नहीं थे। ऐसे में कोई हादसा भी हो सकता है। मालूम हो कि अभी दो दिन पहले ही बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवरेज साफ करते समय एक कर्मचारी की मौत भी हो चुकी है।