सतलुज यमुना लिंक नहर को पाटते हुए लोग
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब विधानसभा में एसवाईएल नहर के लिए बिल पास होते ही नहर को पाटने का काम तेजी से शुरू हुआ। नहर में कई नियमों को दफन कर मिट्टी डाल दी गई। नहर पाटने में पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ीं।
एक किसान को अपना खेत समतल करने के लिए डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्री सेंटर (डीआईसी) से मंजूरी लेना जरूरी है, लेकिन नहर पाटने के लिए बिना मंजूरी मिट्टी खोद दी गई। रातोरात इतने बड़े स्तर पर सैकड़ों जेसीबी मशीनों से जिस तरह मिट्टी नहर में भरी गई, वह साफ तौर पर पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है। यह सब खुलेआम पर हुआ, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
लंबे इंतजार के बाद मिलती है मंजूरी
भारतीय किसान यूनियन (सिद्धूपुर) के पूर्व अध्यक्ष बलतेज सिंह के मुताबिक खेत समतल करने के लिए भी केवल तीन फुट तक की मंजूरी मिलती है। यह मंजूरी लेने के लिए भी कई-कई दिन लग जाते हैं।
कोई उल्लंघन नहीं हुआ : शर्मा
उद्योग विभाग के मुख्य संसदीय सचिव एनके शर्मा का कहना है कि मिट्टी कहीं से खोदकर ट्रकों में नहीं लाई गई। जमींदारों ने मिट्टी से नहर को समतल किया। ऐसे में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही यह काम बंद हो गया और सरकारी मशीनरी निगरानी कर रही है।
रोपड़ में पेड़ बन रहे थे रोड़ा, काट गिराए
सतलुज यमुना लिंक नहर को पाटते हुए लोग
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एसवाईएल नहर पर सुप्रीम कोर्ट के यथास्थिति के फैसले के बाद किसानों ने नहर को भरने और अपनी जमीनों पर कब्जा करने का काम तो बंद कर दिया, लेकिन इन तीन दिनों में काटे गए सैकड़ों पेड़ वन विभाग के लिए सिरदर्दी बने हुए हैं।
जानकारी के अनुसार अकेले रोपड़ जिले में ही सैकड़ों पेड़ काटे गए हैं, जबकि वन विभाग के पास इसका आंकड़ा करीब डेढ़ सौ है। डीएफओ नरेश महाजन ने अमर उजाला को बताया कि अब तक उनके पास 156 पेड़ों के काटे जाने की रिपोर्ट आई है। कुछ पेड़ रिकवर कर लिए गए हैं जबकि फील्ड स्टाफ द्वारा अब तक इस संबंधी पूरी रिपोर्ट नहीं दी गई है।
उन्होंने कहा कि रविवार शाम तक सारी रिपोर्ट आने के बाद ही काटे गए पेड़ों के आंकड़े की सही जानकारी मिल पाएगी। कार्रवाई के सवाल पर डीएफओ महाजन कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने कहा कि पूरी रिपोर्ट आने के बाद देखा जाएगा कि किस तरह की कार्रवाई किस पर करनी है। जो लोग पेड़ काटकर लेकर गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
पेड़ काटने की जानकारी नहीं : वन मंत्री
वन मंत्री चुन्नी लाल का कहना है कि उन्हें जानकारी मिली थी कि नहर भरने के लिए लोगों ने डिच मशीनों का उपयोग किया था। पेड़ काटने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के बारे में उन्हें पता नहीं है। न ही कोई मामला नोटिस में आया है या विभाग के पास शिकायत आई है। भविष्य में यदि कोई शिकायत मिलती है या मामला नोटिस में आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ये हैं माइनिंग के नियम
सतलुज यमुना लिंक नहर को पाटते हुए लोग
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माइनिंग मुद्दे पर एक याचिका की केंद्र सरकार की ओर से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पैरवी करते रहे एडवोकेट ओंकार सिंह बटालवी के मुताबिक सरकार ने मिट्टी निकालने के लिए जमीन के क्षेत्रफल को वर्गों में बांटा था। पांच हेक्टेयर से कम जमीन पर राज्य सरकार अपने स्तर पर मिट्टी निकालने की मंजूरी दे सकती है।
पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए इनवायरनमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट कमेटी बनाने का भी नियम है। यह कमेटी तय करती है कि मिट्टी हटाने से पर्यावरण को नुकसान न हो रहा हो।
बड़े स्तर पर मिट्टी खुदाई करनी हो तो केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ही मंजूरी दे सकता है। उधर, एसवाईएल भरने के लिए किनारों पर मिट्टी के ऊंचे-ऊंचे ढेर हटाकर नहर को समतल कर दिया गया।