विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के सफल किडनी ट्रांसप्लांट में पीजीआई के रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के पूर्व एचओडी डा. मुकुट मिंज ने अहम भूमिका निभाई है। डोनर से किडनी निकालने और ट्रांसप्लांट करने वाली टीम का नेतृत्व डा. मुकुट मिंज और एम्स के डा. वीके बंसल ने किया। प्रोफेसर मिंज ने बताया कि एम्स से दो हफ्ते पहले ही फोन आया था कि सुषमा स्वराज को किडनी का ट्रांसप्लांट होना है। ट्रांसप्लांट होने के दो दिन पहले ही वे दिल्ली चले गए थे।
36 साल में 3300 किडनी ट्रांसप्लांट किए
प्रोफेसर मुकुट मिंज को किडनी ट्रांसप्लांट में महारत हासिल है। 36 साल में उन्होंने 3300 किडनी ट्रांसप्लांट की। उनकी देखरेख में ही पीजीआई ने पेन्क्रियाज ट्रांसप्लांट शुरू किया था। उड़ीसा के वीएसएस मेडिकल कॉलेज से एमबीए करने के बाद प्रो. मिंज ने 1980 में पीजीआई में बतौर जूनियर रेजिडेंट ज्वाइन किया। 1986 में फैकल्टी बने। इसी साल पीजीआई से रिटायर होने के बाद उन्होंने मोहाली फोर्टिस ज्वाइन किया।
कार्डियक अरेस्ट के बाद भी आर्गन ट्रांसप्लांट किए
प्रोफेसर मिंज के ही नेतृत्व में पीजीआई देश का पहला ऐसा अस्पताल बना था, जिसमें कार्डियक अरेस्ट के बाद ऑर्गन ट्रांसप्लांट किए गए। हालांकि यह सबसे कठिन होता है। इसमें डाक्टर को मात्र 30 मिनट का समय बचता है। हालांकि बताया जा रहा है कि उसके बाद से देश के दूसरे हास्पिटलों ने कार्डियक अरेस्ट के बाद आर्गन ट्रांसप्लांट शुरू कर दिए हैं। प्रोफेसर मिंज ने कई स्टेट के डाक्टरों को किडनी ट्रांसप्लांट की ट्रेनिंग भी दी है।