फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh: मजबूरी में पराली जलाते हैं पंजाब के किसान, आठ जिलों में किए गए सर्वे में हुआ खुलासा

Wed, 13 Sep 2023 02:27 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

रिपोर्ट के अनुसार सभी किसान हैप्पी सीडर और सुपर सीडर के इस्तेमाल से खुश हैं। कुछ ने कहा कि उनके पास 30 से 35 हॉर्स पावर के ट्रैक्टर हैं लेकिन हैप्पी सीडर का इस्तेमाल करने के लिए 55 से 60 हॉर्स पावर के ट्रैक्टर की जरूरत होती है।
विज्ञापन
पराली जलाते किसान - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब सरकार की कई योजनाओं के बावजूद पराली जलाने, उससे हो रहे वायु प्रदूषण को लेकर किसानों से बातचीत के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की गई है। मंगलवार को सेक्टर-27 स्थित प्रेस क्लब में असर सोशल इंपैक्ट एडवाइजर और क्लीन एयर पंजाब की ओर से यह रिपोर्ट जारी की गई। इस दौरान पराली के मुद्दे पर एक पैनल चर्चा भी की गई।

विज्ञापन


असर के स्टेट क्लाइमेट एक्शन के हेड सनम सुतिरथ वजीर ने कहा कि पंजाब के आठ जिलों में आठ महीनों में 450 से ज्यादा किसानों से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है। निष्कर्ष निकला है कि कोई भी किसान अपनी खुशी से पराली नहीं जलाता। सभी मजबूरी में ऐसा कर रहे हैं। 

ज्यादातर किसानों ने कहा कि वह पराली इसलिए जलाते हैं क्योंकि एक फसल लेने के बाद दूसरी फसल बीजने के लिए बहुत कम दिन बचते हैं। ऐसे में वह रिस्क नहीं लेना चाहते और खेत में ही पराली को जलाकर अगली फसल तैयार करने लगते हैं। भले ही बाहर से लगता है कि पंजाब का किसान बहुत खुशहाल है लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही है। उन्होंने मोगा के एक किसान की कहानी बताई। कहा कि वह बेटे को तीन साल से इंजीनियरिंग कॉलेज भेजने का वादा कर रहे हैं। त्योहार आते हैं तो खुश होने के बजाय डर जाते हैं कि पैसे कहां से आएंगे।
विज्ञापन


मशीनों पर मिलने वाली सब्सिडी व्यवस्था में खामी
रिपोर्ट के अनुसार सभी किसान हैप्पी सीडर और सुपर सीडर के इस्तेमाल से खुश हैं। कुछ ने कहा कि उनके पास 30 से 35 हॉर्स पावर के ट्रैक्टर हैं लेकिन हैप्पी सीडर का इस्तेमाल करने के लिए 55 से 60 हॉर्स पावर के ट्रैक्टर की जरूरत होती है। ज्यादातर जिलों में सब्सिडी की समस्या है, जो मशीन उपकरण बिना सब्सिडी के हैं, वह सस्ते हैं और सब्सिडी वाली मशीन काफी महंगी है। 

एक किसान ने कहा कि मोबाइल के दाम एक जैसे रहते हैं लेकिन खेती के उपकरणों के दाम हफ्ते में तीन बार बढ़ते हैं। लगभग सभी किसान इस बात पर सहमत नजर आए कि अगर कोई उनके खेत से पराली ले जाए तो वह खुश रहेंगे। सनम सुतिरथ वजीर ने कहा कि किसानों ने जो भी कहा, उन्होंने इसे रिपोर्ट में शामिल किया है।

वह दिन दूर नहीं, जब लोग लैब में बना खाना खाएंगे : देविंदर शर्मा
कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने कहा कि पंजाब में मशीनीकरण पर काफी जोर दिया जा रहा है। आज पंजाब में पराली जलाने के प्रबंधन के लिए 1.17 लाख मशीनें हैं। इस साल 20 हजार जोड़े जाएंगे। ऐसे ही चलता रहा तो पंजाब मशीनों का कबाड़खाना बन जाएगा। सरकार किसानों को हर साल दो हजार करोड़ रुपये नहीं दे सकती लेकिन कर्मचारियों को 12 हजार करोड़ का डीए दिया जा रहा है। कहा कि वह कर्मचारियों को डीए मिलने के खिलाफ नहीं है। उनको मिलना चाहिए लेकिन सरकार को किसानों पर भी भरोसा करना चाहिए। विभिन्न देशों से बायोफ्यूल एलाइंस हुआ है। अब वह दिन दूर नहीं है, जब लोग लैब में बना खाना खाएंगे। फिनलैंड में पहली फूड फैक्टरी स्थापित हुई है, जो लाखों लोगों के लिए खाना फैक्टरी में तैयार कर रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें