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सर्जिकल अटैक: लीक हो रही हैं सेना के जवानों की सीक्रेट सूचनाएं

Sun, 09 Oct 2016 09:41 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, अंबाला कैंटोनमेंट।
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Indian Army - फोटो : Amar Ujala
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सर्जिकल अटैक के बाद सरहद पर जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उसके मद्देनजर नार्थ इंडिया की तमाम बड़ी छावनियां हाई अलर्ट पर हैं।
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यहां उत्तर भारत का सबसे बड़ा आर्मी और एयरफोर्स बेस कैंप भी पूरी तरह से हाई अलर्ट पर है। लेकिन ऐसी स्थिति में यहां अंबाला में वर्दी बिक्री के दौरान सुरक्षा से ऐसा खिलवाड़ हो रहा है, जो एक बड़ा खतरा बन सकता है। यहां अंबाला में वर्दी बिक्री के दौरान सेना के जवानों की अहम सूचनाएं लीक हो रही है, जिस ओर न तो प्रशासन का ध्यान है और न ही लोकल मिलिट्री अथॉरिटी का। लेकिन रक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि इस रिकार्ड का मिसयूज हुआ, तो बहुत बड़ा खतरा बन सकता है।

अंबाला में चूंकि सेना का बड़ा बैस कैंप है, इसलिए यहां सेना की वर्दियां भी मिलती है। लेकिन हैरतअंगेज बात यह है कि ये वर्दियां सैन्य क्षेत्र में नहीं, अपितु सिविल क्षेत्र में धड़ल्ले से बिकती है। सिविल एरिया में दो बाजार ऐसे हैं, जहां सेना की वर्दियों से लेकर हर तरह का सामाना बिना रोकटोक बिकता है, कोई भी इन बाजारों से सेना की वर्दियां व अन्य सामान आराम से खरीद सकता है, उन्हें कोई रोकने-टोकने वाला नहीं।
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इस तरह हो रही जवानों की सूचनाएं लीक

Indian Army - फोटो : Amar Ujala
जब भी कोई बड़ा आतंकी हमला होता है तो यहां अंबाला में जिला प्रशासन सेना की वर्दी से संबंधित बयान जारी करता है और दुकानदारों को वर्दी खरीदने वालों पर नजर रखने की हिदायत देता है। लेकिन इस साल पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद प्रशासन ने सभी दुकानदारों का आदेश दिए थे कि वे वर्दी खरीदने वालों का पूरा रिकार्ड रखकर ही वर्दी बेचेंगे। इसके चलते अधिकतर दुकानदारों ने ऐसा करना शुरू कर दिया है। लेकिन दुकानदारों की ये कार्यप्रणाली सेना के लिए बड़ा खतरा बन रही है। क्योंकि पहले तो सेना के जवान यहां सिविल एरिया के बाजारों में सेना की वर्दी खरीदने को मजबूर हैं। 

दूसरा, खरीद प्रक्रिया के दौरान जवानों को वर्दी खरीदते वक्त अपना पूरा नाम, यूनिट का नाम, मोबाइल नंबर, यूनिट नंबर इत्यादि जानकारी दुकानदार को बतानी पड़ती है। दुकानदार ये जानकारियां रजिस्टर में नोट करने के बाद उस जवान को वर्दी देते हैं। यानी इसके जरिये सेना के जवानों और उसकी यूनिट संबंधी तमाम जानकारी दुकानदार और उनके कारिंदों के पास पहुंच जाती है और रजिस्टर में दर्ज हो जाती है।

ये सूचनाएं इस तरह बन सकती हैं बड़ा खतरा

आर्मी प्रमुख जनरल दलबीर सुहाग वेस्टर्न कमांड का दौरा करते हुए
रक्षा विशेषज्ञ व मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस से रिटायर्ड ज्वाइंट डायरेक्ट तीर्थ राम काला के अनुसार वर्दी बिक्री के दौरान सेना के जवानों और उनकी यूनिटों की तमाम सूचनाओं का दुकानदारों द्वारा रजिस्टर में दर्ज करके रखना बहुत बड़ी चूक है।

उन्होंने बताया कि सेना की विभिन्न छावनियों में कौन से यूनिटें मौजूद है, वहां कौन जवान तैनात है, उनके मोबाइल नंबर क्या है? यूनिटों का नंबर क्या है? वगैरह ये जानकारियां बहुत सीक्रेट होती है और यहां ये जानकारियां वर्दी बिक्री के  दौरान सार्वजनिक हो रही है। ये बहुत हैरानी की बात है।

रक्षा विशेषज्ञ के अनुसार यदि जवानों व यूनिटों की सूचनाएं दर्ज रजिस्टर किसी संदिग्ध के हाथ लग जाएं और वे उसमें दर्ज विभिन्न यूनिटों के सेना के जवानों के मोबाइल नंबरों के जरिए उनसे संपर्क कर उन्हें किसी भी प्रकार की लालच देकर किसी बड़े हमले की योजना बनाएं, तो अपने आप में बड़ा खतरा बन सकता है।

दूसरा, इन रजिस्टरों के जरिये संदिग्धों को यह भी मालूम चला जाएगा कि कौन-कौन स्टाइकर यूनिटें अंबाला में तैनात है? रक्षा विशेषज्ञ के अनुसार सेना और प्रशासन तुरंत इस मसले पर संज्ञान लें, वरना ये अहम सूचनाएं लीक होती रहेंगी और एक बड़े खतरा का सबब बनी रहेंगी। दूसरा, सेना की वर्दियां सिविल एरिया में बिकनी बंद की जाएं, जो लोग ये कारोबार करते हैं, उन्हे सैन्य क्षेत्र में लाइसेंस देकर इस तरह के सामान बेचने की अनुमति दी जाए और अपने क्षेत्र में सेना इस तरह बिक्री पर पूरी निगरानी रखे।
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सेना ने भी तैयार की रिपोर्ट

Indian Army - फोटो : Amar Ujala
लोकल मिलिट्री अथॉरिटी की एक स्पेशल विंग ने इस बाबत अपनी भी एक रिपोर्ट तैयार की है। इसी विंग से जुड़े सेना के एक अफसर ने माना कि इस तरह तो सेना के जवानों और यूनिटों की सूचनाएं लीक हो रही है, जो कि खतरनाक बात है।

उन्होंने कहा कि आतंकी हमेशा हमला करने के लिए आर्मी की वर्दियां और सामान की तलाश में रहते हैं। ऐसे में वर्दी बिक्री के दौरान सेना के जवानों और उनकी यूनिटों की सूचनाएं भी लीक हो रही है। उनके अनुसार इस बारे में रिपोर्ट तैयार कर ली गई है , जिसे आला सैन्य अफसरों को भेजा जाएगा। ताकि सेना के आला अफसरों पर इस पर संज्ञान लेकर इस पर कोई ठोस कदम उठाएं। उनके अनुसार जिला प्रशासन के आला अफसरों से भी इस बारे में बातचीत की जाएगी।
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