सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में लाया गया कि लगभग 50 मामले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित हैं। इनमें वेंडर्स के पक्ष में अंतरिम स्थगन आदेश प्रभावी हैं। इसके अलावा करीब 170 मामले ग्रीवेंस रिड्रेसल और डिस्प्यूट रेजोल्यूशन कमेटी के समक्ष लंबित हैं, जिन पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा कि इन मामलों में अंतरिम आवेदनों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए और तीन सप्ताह के भीतर उन्हें निपटाया जाए।
आज यूटी प्रशासन लेगा बड़ा फैसला
यूटी चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया कि इस संबंध में आवश्यक प्रशासनिक कदम 18 दिसंबर तक उठा लिए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए आदेश पारित किया। इसके साथ ही कोर्ट ने ग्रीवेंस रिड्रेसल और डिस्प्यूट रेजोल्यूशन कमेटी को स्पष्ट निर्देश दिए कि उसके समक्ष लंबित सभी मामलों का निस्तारण दो सप्ताह की अवधि के भीतर सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर आगे अंतरिम निर्देश जारी किए जा सकते हैं। फिलहाल मामला आदेशों के लिए सुरक्षित रखा गया है।
मलकीत सिंह ने दायर किया था याचिका
यह याचिका मलकीत सिंह और अन्य की ओर से दायर की गई थी जिसमें यूटी चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ राहत की मांग की गई है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने की, जिसमें जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटेश्वर सिंह शामिल थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि बड़ी संख्या में मामले विभिन्न मंचों पर लंबित हैं, जिससे स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।