एसवाईएल नहर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और पंजाब को फटकार के बाद पंजाब-हरियाणा में सियासी हलचल तेज हो गई है। एसवाईएल को लेकर मचे इस सियासी उफान में हरियाणा सरकार जहां सियासत का ‘मास्टर स्ट्रोक’ खेलना चाहती है, वहीं पंजाब की नई कैप्टन सरकार के समक्ष भी कई तरह की चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का फैसला पहले से ही हरियाणा सरकार के पक्ष में हैं। मगर पंजाब की ओर से इस फैसले की अनुपालना न करने की वजह से हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आदेशों की अनुपालना करवाने की अपील डाली हुई है, जिसकी एक सुनवाई 11 जुलाई को चुकी है और अगली सुनवाई 7 सितंबर 2017 को होनी है।
माहौल हरियाणा के पक्ष में नजर आा रहा है
नहर खोदने पंजाब जा रहे इनेलो नेता गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
मजबूत पैरवी के चलते माहौल हरियाणा के पक्ष में ही दिख रहा है और सुप्रीम कोर्ट ने नहर निर्माण के आदेश भी दे दिए हैं। अब ऐसे में हरियाणा सरकार चाहती है कि जैसे-तैसे पंजाब जल्द से जल्द नहर का निर्माण शुरू करवा दे। क्योंकि इससे हरियाणा सरकार दो बड़े निशाने साध पाएगी।
पहला यह कि नहर निर्माण से हरियाणा में एसवाईएल का पानी मिलने की संभावनाएं ज्यादा बलवती हो जाएंगी और दूसरा यह कि हरियाणा की राजनीति के इतिहास में एसवाईएल नहर का निर्माण भाजपा सरकार के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि और मील का पत्थर साबित होगी, जिसे भाजपा आगामी वर्ष 2019 के प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में अच्छी तरह से भुनाकर हरियाणा की सियासत में अपनी जड़ें मजबूत कर सकती है।
आसान नहीं पंजाब की राह, पांच बड़ी चुनौतियां
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पंजाब सरकार की बेचैनी बढ़ गई है। एसवाईएल मसले पर अब नहर निर्माण को लेकर पंजाब की राह आसान नहीं है। मौजूदा कैप्टन सरकार के समक्ष पहली चुनौती पूर्व की बादल सरकार की ओर से पंजाब के विधानसभा चुनाव-2017 से ठीक पहले एसवाईएल नहर को डी-नोटिफाई करने की वजह से खड़ी हुई है।
दूसरी चुनौती सुप्रीम कोर्ट के नहर निर्माण के आदेश से खड़ी हो गई है। तीसरी चुनौती इस मुद्दे पर पंजाब में विपक्षी दलों की घेराबंदी से निपटने की है। चौथी चुनौती पंजाब के पानी को पंजाब तक सीमित रखने की है और पांचवीं बड़ी चुनौती यह है कि आखिरकैसे इस मसले पर हरियाणा सरकार को संतुष्ट कर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनुपालना की जाए?
फिलहाल पंजाब सरकार के मंत्री और अफसरों का अमला इसी जुगत में जुटा है। दूसरी ओर, हरियाणा ने पंजाब पर लगातार सियासी दबाव बनाना शुरू कर दिया है।