सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू
भारत और पाकिस्तान के बंटवारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कई बड़ी बातें कहीं।
वे बुधवार को पीयू के लॉ ऑडिटोरियम में स्टूडेंट वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित ‘संवाद’ सेमिनार में ‘भारत के मौजूदा हालात और लीगल सिस्टम ...थीम पर बोल रहे थे। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बंटवारे को ऐतिहासिक घोटाला बताया।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने बिजनेस को बढ़ाने के भारत-पाकिस्तान का बंटवारा करवाया। अंग्रेजों के लिए इन दोनों देशों में हथियारों की बड़ी मार्केट का स्कोप था। उन्होंने हथियारों की खरीद पर जरूरत से अधिक बजट को गलत बताया। इस पैसे को लोगों की डेवलपमेंट पर खर्च करने की वकालत की। काटजू ने देश में समलैंगिकता का समर्थन किया और धारा 377 हटाने की मांग की।
भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश फिर से एक हो जाएंगे
मार्कंडेय काट्जू
काटजू ने कहा कि आने वाले 10-15 सालों में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश फिर से एक हो जाएंगे। उन्होंने आर्मी में भी जातिवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि वह किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं। देश में लीगल एजुकेशन को बढ़ाने की काफी जरूरत है। वकालत के मौजूदा सिलेबस को लेकर उन्होंने कहा कि कोर्स में जो पढ़ाया जाता है वह व्यवहारिक ज्ञान से बिल्कुल अलग होता है।
इस संबंध में काटजू ने बार काउंसिल को लिखा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में एक टीवी चैनल को आतंकी घटना का कवरेज दिखाए जाने पर एक दिन के लिए बैन करने के फैसले को भी काटजू ने गलत बताया। उन्होंने कहा कि चैनल ने लाइव तस्वीरें दिखाई ही नहीं।
मीडिया भी कई मामलों में भेदभाव करता है
मार्कंडेय काट्जू
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन रहे काटजू ने कहा कि मीडिया भी कई मामलों में भेदभाव करता है। उन्होंने कहा कि देश में किसानों द्वारा आत्महत्या जैसे मामलों पर मीडिया गहराई से ध्यान नहीं देता।
जस्टिस काटजू ने कहा कि हाल ही में भोपाल में सिमी आतंकी होने के नाम पर एनकाउंटर को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि बहुत से एनकाउंटर झूठे (फेक) होते हैं।
उन्होंने पंजाब में आतंकवाद का हवाला देते हुए सीधे तौर पर केपीएस गिल का नाम भी ले डाला। काटजू ने कहा कि गिल के जमाने में युवकों को आतंकी बताकर गोली मार दी जाती थी। ज्यूडीशियल अफसरों की नियुक्ति में धांधली पर काटजू ने टिप्पणी करने से मना कर दिया।