बिना जांच मंत्री द्वारा आठ सुपरवाइजरों को निलंबित किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। लंबित मांगों और इस मामले को लेकर अब आईसीडीएस सुपरवाइजर एसोसिएशन 15 जून को महिला एवं बाल विकास विभाग के पंचकूला निदेशक कार्यालय का घेराव करेंगी। इस प्रदर्शन को सर्व कर्मचारी संघ ने भी अपना समर्थन दिया है। साथ ही सरकार को चेताया है कि अगर लंबित मांगों को नहीं माना गया तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
आईसीडीएस सुपरवाइजर्स वेलफेयर एसोसिएशन की राज्य प्रधान सुशीला सिहाग और महासचिव संतोष यादव व कोषाध्यक्ष हरदेव ने बताया कि एसोसिएशन ने 29 मई को रोहतक में राज्य स्तरीय कन्वेंशन करके प्रदेशस्तरीय आंदोलन का एलान किया था। इसकी लिखित सूचना मंत्री व विभाग के सभी आला अधिकारियों की दी गई थी। सुपरवाइजरों ने 1 जून से 7 जून तक काले बिल्ले लगाकर राज्य में विरोध प्रकट किया है और 7 जून को जिला कार्यक्रम अधिकारियों के कार्यालयों पर आक्रोश प्रदर्शन करते हुए निदेशक को ज्ञापन भिजवाए गए।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के दबाव में विभाग द्वारा पिछले चार महीने का वेतन जारी किया गया है लेकिन अभी तक निलंबित सुपरवाइजर को बहाल नहीं किया और न ही अन्य लंबित मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई अमल में लाई गई है। इससे सुपरवाइजरों में रोष है। इसलिए एसोसिएशन ने 15 जून निदेशक कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि उनकी प्रमुख मांगें फतेहाबाद के खंड रतिया के आठ सुपरवाइजरों को बहाल करने, खाली पदों को भरने, मोबाइल फोन या टैबलेट देने के साथ कई माह से लंबित वेतन जारी करने की मांग है।
1016 में से 288 पद खाली
सर्व कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग सुपरवाइजरों का जमकर शोषण कर रहा है और क्राइम ब्रांच की भांति काम कर रहा है। विभाग में सुपरवाइजर के 1016 पद स्वीकृत हैं, जिसमें 733 भरे हुए हैं और 288 खाली पड़े हैं। इस कारण सुपरवाइजरों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। एक-एक सुपरवाइजर के पास तीन, चार व पांच सर्कल का कार्यभार भी हैं। ऐसे में सुपरवाइजर के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहे हैं। मांगों को लेकर एसोसिएशन ने आंदोलन करने का फैसला लिया है।