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सुनील जाखड़ ने केंद्र सरकार पर लगाया बड़ा आरोप, कहा- NRC का विरोध करने पर पंजाब का पैसा रोका

Wed, 25 Dec 2019 01:14 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सुनील जाखड़ - फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ ने केंद्र पर राज्य का पैसा रोकने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सब से पहले एनआरसी के खिलाफ आवाज बुलंद की थी और इसी वजह से केंद्र सरकार पंजाब के 6000 करोड़ रुपये दबाए बैठी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह व्यवहार देश के संघीय ढांचे के विपरीत है। 

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उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश के संविधान से छेड़छाड़ के केंद्र सरकार के इरादों को कभी सफल नहीं होने देगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डिटेंशन सेंटरों और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर संबंधी अपनी सरकार का रुख स्पष्ट करने को कहा है। 

जाखड़ ने मोदी सरकार के उन दावों की भी निंदा की, जिनमें सरकार ने दावा किया है कि राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर पर कभी कोई विचार नहीं हुआ। उन्होंने प्रधानमंत्री को अपनी पार्टी का चुनाव मेनिफेस्टो देखने की सलाह दी, जिसकी क्रम संख्या सात पर पार्टी ने साफ किया है कि वह राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर लागू करेगी।

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जाखड़ ने कहा कि देश को धर्म के नाम पर बांटने का जो काम अंग्रेज अधूरा छोड़ गए थे, भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार वही काम अब कर रही है। जाखड़ ने कहा कि केंद्र सरकार देश में धर्म के नाम पर विभाजन कर रही है। जाखड़ ने सरकार द्वारा राज्यसभा में दिए बयान की कापी मीडिया से साझा की। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के कथन के उलट राज्यसभा में 24 जुलाई, 2019 को एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया था कि भारत सरकार ने 9 जनवरी, 2019 को ही सारे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चिट्ठी लिखकर मॉडल डिटेंशन सेंटर मैनुअल का प्रारूप भेजा था, जिसमें प्रवासी लोगों को बंदी बनाकर रखने और सेंटरों में किए जाने वाले अन्य इंतजाम के बारे में जानकारी दी गई थी। 

जाखड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री के बयान और उनके मंत्री द्वारा संसद में दिए बयान परस्पर विरोधी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि अगर प्रधानमंत्री का बयान सही है ? तो वे अपने मंत्री को हटाएं, जिसने संसद में गुमराह करने वाला बयान दिया। और अगर मंत्री का बयान सही है तो प्रधानमंत्री देश से माफी मांगें।
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