पंजाब के विधायक सुखपाल सिंह खैरा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा समन किए जाने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ईडी की कार्रवाई को उन्होंने राजनीतिक रंजिश की वजह से रची साजिश करार दिया और ईडी को मोहरा बताया। खैरा के मुताबिक ईडी का कहना है उन्होंने 84 लाख रुपये खाते में जमा करवाए हैं। याची आयकर दाता है और सभी जानकारी विभाग को देता है। यदि पूछताछ करनी है तो आयकर विभाग को करनी चाहिए, ईडी को नहीं।
ईडी ने 2015 के एक केस में 12 मार्च को समन जारी कर उन्हें पेश होने को कहा था। समन के इस आदेश को खैरा ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दे दी। खैरा ने आदेश को रद्द करने की मांग की। साथ ही यह भी आशंका जताई थी कि उनके परिवार के सदस्यों को भी समन जारी किए जा सकते हैं। ईडी ने पिछली सुनवाई पर हलफनामा दायर कर पैसे के लेन-देन से जुड़े आरोप लगाए थे। आरोपों का जवाब देते हुए गुरुवार को खैरा ने कहा कि पूरी कार्रवाई राजनीतिक रंजिश के तहत पीएमएल एक्ट के प्रावधानों को ताक पर रख की जा रही है।
ईडी ने कहा कि याची ने बैंक खाते में 84 लाख रुपये नकद जमा करवाए। इस पर खैरा ने कहा है कि वह आईटीआर भरते हैं और पूरा रिकॉर्ड मौजूद है। सवाल पूछने का हक आयकर विभाग का बनता है। साथ ही याची ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट 31 दिसंबर, 2017 को केस पर रोक लगा चुका है। ऐसे में कैसे इस केस में उनके खिलाफ आगे कार्रवाई की जा रही है। खैरा ने उन पर ईडी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करने की मांग की है। हाईकोर्ट ने खैरा के इस जवाब को रिकॉर्ड में लेते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी है।