गत 22 अगस्त की मूसलाधार बारिश ने जमकर तबाही मचाई है। बलटाना एरिया में किसानों की पचास एकड़ धान की फसल पानी में पूरी तरह डूब गई है। पिछले चार दिनों से किसान अपने खेतों से पानी निकालने में जुटे हुए हैं, लेकिन पानी का स्तर कम नहीं हो पाया है। फसल के पानी में डूब जाने से किसान चिंतित हैं।
किसानों का कहना है कि उनकी धान की फसल सुखना से छोड़े गए पानी के कारण बर्बाद हुई है। जिसके मुआवजे के लिए किसान लगातार सरकार से अपील कर रहे हैं। इस समय धान की फसल पर सुखना का पानी ऐसा कहर लेकर आया है, कि कुछ किसानों के परिवार के भरण पोषण की समस्या भी उनके लिए पैदा हो गई है।
क्योंकि कई किसानों ने 25 हजार रुपये प्रति एकड़ जमीन ठेके पर लेकर धान लगाई थी, लेकिन बरसाती पानी ने सब कुछ तबाह करके रख दिया। दरअसल चंडीगढ़ प्रशासन ने सुखना झील के रेगुलेटरी एंड पर बने दो फ्लड के गेट को पानी की निकासी के लिए रविवार की सुबह दो घंटे के लिए खोल दिया था, जिसके चलते सुखना का पानी बलटाना के पूरे एरिया में भर गया। जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान किसानों का हुआ है।
ठेके पर जमीन लेकर खेती की, पानी में हो गई बर्बाद
बलटाना निवासी सुखदेव ने बताया कि उनकी 15 एकड़ धान की फसल खराब हो गई है। यह समय उनके और परिवार के लिए काफी मुश्किल भरा है, क्योंकि 25 हजार रुपये प्रति एकड़ जमीन ठेके पर लेकर उन्होंने धान की बुआई की थी, लेकिन सुखना के छोड़े गए पानी से उनका लाखों रुपये का नुकसान हो गया। सुखदेव ने बताया कि उनका करीब 8 लाख 25 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। बलटाना एरिया में करीब 50 एकड़ जमीन की फसल बरसाती पानी में डूबी है।
दस एकड़ फसल खराब...
बलटाना निवासी रविंदर सिंह ने बताया कि किसानों को सूचना दिए बिना ही सुखना का पानी छोड़ दिया गया। करीब पांच लाख रुपये की फसल बरसाती पानी में डूबने से खराब हो गई है। पिछले तीन दिनों से खेतों से पानी निकाल रहे हैं, लेकिन पूरा पानी नहीं निकल पाया। प्रशासन की ओर से भी अब तक कोई मदद नहीं मिली है।
जिला प्रशासन से मदद की अपील...
जसविंदर सिंह ने बताया कि 20 एकड़ में खड़ी फसल बरसाती पानी में डूब गई है। काफी कोशिश के बाद खेत से पानी नहीं निकल पाया है। पानी निकलने के बाद ही अंदाजा लग पाएगा कि कितनी फसल बर्बाद हुई है। फिलहाल प्रशासन से अपील है कि खेतों से पानी निकालने का कोई बंदोबस्त किया जाए, जिससे पूरी फसल बर्बाद होने से बचे और किसानों को राहत मिले।