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Chandigarh News: सुखना के फ्लड गेट फिर खुले, 9 सितंबर तक यलो अलर्ट, हो सकती है भारी बारिश

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण सुखना लेक के फ्लड गेट एक बार फिर खोलने पड़े। यह इस मानसून सीजन में 10वीं बार है जब लेक का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। शनिवार दोपहर करीब 12 बजे सुखना लेक में पानी का स्तर 1162.45 फीट तक पहुंचने के बाद 3 इंच तक एक फ्लड गेट खोला गया। यूटी प्रशासन की ओर से फ्लड गेट खोलने से पहले बापूधाम, किशनगढ़ व सुखना चो के रास्ते पर पड़ने वाले पुलों पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस तैनात की गई।
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मौसम विभाग ने चंडीगढ़ में 9 सितंबर तक यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान शहर में तेज बारिश होने की संभावना जताई है। शनिवार को भी शहर में दोपहर 12 बजे के आसपास 15-20 मिनट के लिए तेज बारिश हुई। इसके बाद हल्की बूंदाबांदी जारी रही। पूरे दिन में कुल 9.3 मिमी बारिश दर्ज की गई। शहर का अधिकतम तापमान 29.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से कम है। इस मानसून सीजन में अब तक चंडीगढ़ में 998 मिमी से अधिक बारिश हो चुकी है।
सांसद मनीष तिवारी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया
इस बीच, सांसद मनीष तिवारी ने डड्डूमाजरा और धनास के हिस्सों से गुजर रही पटियाला की राव का दौरा किया। तेज पानी के बहाव के कारण इसके आसपास के खेतों में खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं। स्थानीय लोगों ने सांसद को ज्ञापन सौंपकर कई मांगें रखीं, जिनमें तोगा रोड पर एक नए पुल का निर्माण, बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों के लिए किसानों को मुआवजा और पटियाला की राव की नियमित डी-सिल्टिंग शामिल है। लोगों ने बताया कि पिछले 10 साल से पटियाला की राव से मिट्टी नहीं निकाली गई है जिससे जलभराव की समस्या बढ़ गई है। सांसद तिवारी ने इस संबंध में डीसी निशांत कुमार यादव से बात की और पटियाला की राव की नियमित ड्रेजिंग और किनारों को पक्का करने का अनुरोध किया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि धनास ब्रिज से तोगा ब्रिज तक सड़क का निर्माण कर इसे एक सुंदर वाटरफ्रंट के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके अलावा, उन्होंने नगर निगम को डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड से रिसने वाले पानी से बने दलदल (टोबा) की सफाई के भी निर्देश दिए।
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सुखना के फ्लड गेट बार-बार क्यों खुल रहे हैं?
इस मानसून सीजन में सुखना लेक के फ्लड गेट 10 बार खोले जा चुके हैं, जबकि पिछले साल 2023 में यह संख्या 4, 2022 में 6 और 2021 में 5 थी। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही भारी बारिश और लेक में पानी की अत्यधिक आवक के कारण अधिकारियों को बार-बार गेट खोलने पड़ रहे हैं ताकि शहर के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति न बने। साल 2020 में दो फ्लड गेट खोलने से जीरकपुर के निचले इलाकों में भारी जलभराव हो गया था जिसके बाद से प्रशासन सतर्क हो गया है।
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