बठिंडा रैली को लेकर कैप्टन और सुखबीर की जंग तेज हो गई है। शिअद की रैली के दौरान सुखबीर ने कैप्टन को चुनौती दी थी कि यहां इससे बड़ी रैली करके दिखाएं।
अगले दिन कैप्टन ने चुनौती स्वीकार करते हुए बड़ी रैली करने का दावा किया था। बुधवार को सुखबीर ने कैप्टन से कहा कि वह डींगे न मारें, बठिंडा रैली की तारीख घोषित करें।
शिअद प्रधान ने कहा कि कैप्टन पंजाब के लोगों का यह कह कर अपमान न करें कि उन्हें जबरदस्ती सद्भावना रैली में लाया गया था। वह अकाली दल पर सियासी हमले करने को आजाद हैं, लेकिन पंजाबियों के मान-सम्मान पर यह कह कर हमला न करें कि उन्हें इच्छा के विरुद्ध रैली में शामिल होने को कहा गया था।
सुखबीर ने कहा कि शिअद की रैली में दो लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ देख कर कैप्टन परेशान हो गए हैं। अब अपनी निराशा रैली में शामिल लोगों पर निकाल रहे हैं। ये लोग ही हैं, जो सरकारें बनाते और गिराते हैं। उनका अपमान करने की कोशिश न करें।
सुखबीर ने कहा कि वह कैप्टन के इस दावे को नहीं समझ सके कि कांग्रेस की रैली में हरियाणा-राजस्थान से लोगों को नहीं बुलाया जाएगा। सबसे पहले तो वह कैप्टन को यह मानने के लिए धन्यवाद देंगे कि शिअद का हरियाणा और राजस्थान में जनाधार है। क्या कल वह शिअद पर तमिलनाडू और आंध्र प्रदेश से लोग लाने का आरोप भी लगाएंगे।
सुखबीर ने कैप्टन की इस बात पर सहमति जताई कि शीशे के घरों में रहने वाले दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते। साथ ही कहा कि स्विस फेडरल टैक्स प्रशासन द्वारा फेंके एक पत्थर के भारत पहुंचने की देर है।
कैप्टन के दावों का सारा ढांचा खत्म हो जाएगा। उनके स्विस बैंक खातों की जानकारी जल्द ही भारतीय अधिकारियों से सांझी की जाएगी। फिर सारा देश जान जाएगा कि कौन शीशे के घर में रहता है।