पंजाब में एक जून को आखिरी चरण में मतदान होगा। प्रचार जोरों पर हैं। लुभावने वादों से जनता का मन मोहने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। अभी तक पंजाब में प्रचार एक दूसरे पर छींटाकशी तक सीमित था लेकिन अंतिम चरण आते आते प्रचार का रुख बदलने लगा है।
गुरुओं और पीरों की धरती कहे जाने वाले पंजाब ने हर किसी को खुले दिल से अपनाया है। लेकिन इस बार चुनाव में पहली बार पंजाबी बनाम बाहरी का मुद्दा उठा है।
अकाली दल ने घोषणा पत्र में शामिल किया बाहरी का मुद्दा
शिरोमणि अकाली दल ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में साफ कर दिया है कि वे सिर्फ पंजाबी नौजवानों को रोजगार देंगे, बाहरी लोगों को लिए जमीन की बिक्री नहीं होने देंगे। यानी पंजाब से बाहर के लोगों को यहां नौकरी नहीं मिलेगी। सुखबीर बादल का कहना है कि पंजाब में जमीन भी सिर्फ पंजाबी लोग ही खरीद सकेंगे।
सुखपाल खैरा ने भी उठाया मुद्दा
वहीं संगरूर से कांग्रेस उम्मीदवार सुखपाल खैरा ने पंजाब की सरकारी नौकरिया, गैर पंजाबियों को देने की बात उठाई। उन्होंने इसके लिए आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को घेरा।
संगरूर में एक जनसभा में खैरा ने दावा किया है कि पंजाब की सरकारी नौकरी तो हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल के लोगों को दी जा रही है। जबकि हिमाचल में तो 52 साल पहले गैर हिमाचली को नौकरी व जमीन नहीं देने का कानून बना हुआ है।
खैरा ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल व मुख्यमंत्री भगवंत मान किसी साजिश के तहत पंजाब की जनसांख्यिकीय तस्वीर को बदलना चाहते हैं। पंजाब से करीब 70 लाख लोग पहले ही विदेश चले गए हैं और यदि बाहरी राज्यों से लोगों का आगमन जारी रहा तो पंजाब में पंजाबियों की संख्या कम हो जाएगी। जबकि 2023 में उन्होंने पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवा को इस संबंधी एक प्रस्ताव दिया था। जिसमें पंजाब की नौकरी, पंजाब के नौजवान को मिले। पंजाब की जमीन पर पंजाब के लोगों का अधिकार हो, इसकी मांग की गई थी।