हालत यह है कि पंजाब के कई ब्लॉकों में राजस्थान से भी ज्यादा पानी निकाला जा रहा है। 80 फीसदी ब्लॉकों में आवश्यकता से ज्यादा पानी निकाला गया है। जबकि, राजस्थान में 71 फीसदी पानी के ब्लॉकों से अतिरिक्त पानी निकाला गया है। पिछले दस सालों में छह कमजोर मानसून के बावजूद पंजाब ने गेहूं, धान का उत्पादन बढ़ाया है। पर सूबे को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है।
अब मौका है कि देश पंजाब की सहायता करे। पंजाब को अपने नहरी सिस्टम को आधुनिक बनाने, भूमिगत जल का कायाकल्प करने गेहूं-धान के फसली चक्र से निकालने और दूसरी फसलों का एमएसपी यकीनी बनाने को फंड जारी किए जाए।
सुखबीर ने कहा कि सीमा पर नो मेन्स लैंड की 17 हजार एकड़ जमीन एक्वायर करके किसानो को बीस हजार रुपये प्रति एकड़ सालाना मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने पंजाब को टैक्स हॉलीडे देने का मुद्दा भी उठाया। साथ ही कहा कि दो दशक से पंजाब इंडस्ट्री के पड़ोसी राज्यों में पलायन का संताप झेल रहा है।