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Chandigarh News: ट्राइसिटी के टॉपर्स की सफलता की कहानी... उनकी जुबानी

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चंडीगढ़। 99.4 प्रतिशत अंक लेकर भवन विद्यालय की ध्वनि बंसल कॉमर्स की टॉपर बनी है। उनकी मां डॉ. रीमा बंसल और पिता डॉ. संदीप बंसल दोनों पीजीआई में प्रोफेसर हैं। ध्वनि ने बताया कि पेपर की तैयारी में उन्होंने सेल्फ स्टडी पर ध्यान दिया। स्कूल और ट्यूशन के साथ रोज चार-पांच घंटे पढ़ाई करती थी। उन्होंने बताया कि परीक्षा के दिनों में इंस्टाग्राम अकाउंट बंद कर दिया था। किसी भी चीज से दूरी बनाने के बजाय खुद पर नियंत्रण बनाया था जिससे पढ़ाई के लिए नियमित समय दिया। उन्होंने कहा कि मां ही उनकी रोल मॉडल है। उन्होंने कभी पढ़ाई का दबाव नहीं डाला और हमेशा परेशानियों से बाहर निकलने में सहायता की। ध्वनि ने बताया कि अर्थशास्त्र और गणित उनके पसंदीदा विषय हैं। अर्थशास्त्र में डीयू से स्नातक करने की योजना है।
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ये दिए टिप्स : जूनियर्स को टिप्स देते हुए कहा कि समय का सदुपयोग करना और खुद पर नियंत्रण भी बहुत जरूरी है। खुद पर ज्यादा पाबंदियां न लगाएं और पूरे साल निरंतर पढ़ाई करें।

कला संकाय की टॉपर मेघा तायल : 99.2 प्रतिशत
रोजाना दो-तीन घंटे की पढ़ाई, अब सिविल सर्विस लक्ष्य
99.2 प्रतिशत अंक लेकर भवन विद्यालय की मेघा तायल कला संकाय की टॉपर बनी है। भावी योजना के बारे में उन्होंने बताया कि अब सिविल सर्विस की परीक्षा को पास करना लक्ष्य है। अर्थशास्त्र में दिल्ली के लेडी श्रीराम या सेंट स्टीफन कॉलेज से स्नातक डिग्री लेंगी। उनकी मां रितु तयाल गृहिणी और पिता अजय तायल पेशे से व्यवसायी हैं। मेघा ने बताया कि वह बहुत ज्यादा पढ़ने वाले बच्चों में से नहीं है। रोजाना दो-तीन घंटे ही पढ़ाई करती है। उन्होंने बताया कि दोस्तों के साथ चर्चा और स्वास्थ्य पर ध्यान रखने से पेपर की तैयारी करने में आसानी हुई। परीक्षा के समय कोई खास पाबंदियां खुद पर नहीं लगाई थी। पेपर नजदीक आने पर पर खुद से ही सोशल मीडिया या अन्य चीजें उपयोग करने का मन नहीं करता था। मेघा ने कहा कि उनकी रोल मॉडल नताशा ओशिएन है जो कि एक बायोफिजिसिस्ट हैं। उनसे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने में प्रेरणा मिली।
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ये दिए टिप्स : सकारात्मक सोच रखने वाले दोस्तों के साथ चर्चा करें। केवल परीक्षा के समय पढ़ने के बताया पूरा साल पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखें। भले ही कम घंटे पढ़ें, लेकिन रोज पढ़ें।

मेडिकल की टॉपर आरुषि सूरी : 98.6 प्रतिशत
एक साल ने नहीं चलाया स्मार्ट फोन, मां-पिता की तरह बनना है डॉक्टर
98.6 प्रतिशत अंक लेकर भवन विद्यालय की आरुषि सूरी मेडिकल संकाय की टॉपर बनी है। उनकी मां डॉ दीप्ति सूरी और पिता डॉ विकास सूरी दोनों पेशे से डॉक्टर हैं। आरुषि ने कहा कि वह स्कूल और ट्यूशन के अलावा रोजाना तीन-चार घंटे पढ़ाई करती थी। सफलता के बारे में उन्होंने बताया कि 12वीं में पूरा साल स्मार्ट फोन का प्रयोग नहीं किया और न ही किसी सोशल मीडिया का उपयोग किया। जरूरत पड़ने पर कभी-कभी माता-पिता का व्हाट्सएप चला लेती थी। बोर्ड परीक्षा के साथ नीट की भी तैयारी कर रही थी। अभिभावक और अध्यापकों के सहयोग से पेपर की चिंता को पीछे छोड़ बेहतर तैयारी कर पाई। आरुषि ने कहा कि मां रोल मॉडल है जिन्होंने पढ़ाई में अच्छा करने के लिए हमेशा प्रेरित किया और कभी भी दबाव नहीं डाला। अपने माता-पिता को देखकर ही डॉक्टर बनने का सपना देखा था। अभी नीट की परीक्षा दी है।
ये दिए टिप्स : उन्होंने जूनियर्स से कहा कि रोज पढ़ाई करना बहुत जरूरी है। रोजाना दो घंटे भी पढ़ाई करेंगे तो इससे परीक्षा में अच्छे मार्क्स ओने में मदद मिलेगी।

10वीं में पंचकूला का टॉपर आशीषजोत : 99.8 प्रतिशत
इंजीनियर बनकर हासिल करना चाहता हूं मुकाम
99.8 फीसदी अंक लेकर भवन विद्यालय सेक्टर-15 के छात्र आशीष जोत ने 10वीं में पंचकूला टॉप किया है। अपनी इस उपलब्धि से उत्साहित आशीष जोत का कहना है कि पढ़ाई के दौरान हमेशा उनके अभिभावकों ने उनका हौसला बढ़ाया। आशीष जोत इंजीनियर बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि पढ़ाई क्लास में पूरी करते थे। इस कारण वह इस मुकाम को हासिल कर पाए। एग्जाम के दौरान कोर्स का रिवीजन लगातार किया है। उन्होंने बताया कि उनके पिता मनमोहन सिंह बैंक में काम करते है। वहीं उनकी मां गगनजोत कौर गृहिणी हैं।
ये दिए टिप्स : जूनियर्स को टिप्स देते हुए उन्होंने कहा कि कक्षा में पढ़ते वक्त शिक्षकों को ध्यान से सुनें। इसके अलावा निरंतर पढ़ाई करते हुए रिवीजन भी करें।

12वीं में ट्राइसिटी टॉपर कबीर संधू (नॉन मेडिकल) : 99.4 प्रतिशत
क्वांटम इंजीनियर बनकर स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं कबीर संधू
भवन विद्यालय में 12वीं नॉन मेडिकल में 99.4 फीसदी अंक हासिल कर कबीर संधू ने ट्राइसिटी टॉप किया है। इस उपलब्धि से वह खासे उत्साहित हैं। वह क्वांटम इंजीनियर बनने के बाद स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं। वह माता-पिता को अपना रोल मॉडल को मानते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता कर्नल सुखदेव सिंह संधू आर्मी से रिटायर हैं। वहीं, उनकी मां गगनदीप कौर डॉक्टर हैं। वह साइंस के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं और युवाओं को रोजगारपरक बनाना चाहते हैं। इसके लिए उनके अभिभावक हमेशा उनका हौसला बढ़ाते हैं।
ये दिए टिप्स : उन्होंने कहा कि निरंतर पढ़ाई सफलता के लिए बहुत जरूरी है। जो भी शिक्षक पढ़ाएं उसे गौर से सुनें और नोट्स बनाकर उसका अध्ययन करें।
10वीं में मोहाली टॉपर माहिरा सोनी : 99.6 प्रतिशत
डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना जीवन का लक्ष्य
फेज-10 स्थित मानव मंगल स्कूल में पढ़ने वाली माहिरा सोनी ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 99.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सिर्फ परिवार और स्कूल ही नहीं बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। उनके पिता राजेश सोनी एक निजी म्यूचुअल फंड कंपनी में काम करते हैं और मां साम्या सोनी गृहिणी हैं। वहीं छोटा भाई अभिराज आठवीं कक्षा का छात्र है। माहिरा डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करनी चाहती हैं। माहिरा ने सफलता का श्रेय अध्यापक और परिजनों को दिया। माहिरा को शुरू से ही पढ़ाई का शौक है। रिजल्ट आने के बाद से परिवार में खुशी का माहौल है और बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
ये दिए टिप्स : पढ़ाई को अपना शौक बनाएं। आप फोकस के साथ पढ़ाई करेंगे तो निश्चित की सफलता मिलेगी।

10वीं में मोहाली टॉपर सहज कौर : 99.6 प्रतिशत
माता-पिता के सहयोग से हासिल की सफलता की मंजिल
फेज-10 स्थित मानव मंगल स्कूल में पढ़ने वाली सहज कौर ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 99.6% अंक प्राप्त कर सिर्फ परिवार और स्कूल के साथ-साथ जिले का नाम रोशन किया है। उनके पिता जगदीश सिंह बीएसएनएल में इंजीनियरिंग विभाग में एसडीओ और मां सरकारी उच्च शिक्षा विद्यालय में शिक्षिका हैं। सहज डॉक्टर बनना चाहती है। सहज ने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों और माता-पिता को दिया। वहीं छोटी बहन सिद्धक कौर अभी तीसरी कक्षा में पढ़ती है। सहज की मां जगबीर कौर ने बताया कि बेटी को हमेशा से ही पढ़ाई का शौक है। वह न सिर्फ पढ़ाई में दिलचस्पी लेती है बल्कि घर के कामों में भी उनका हाथ बंटाती है।
ये दिए टिप्स : कड़ी मेहनत और लगन से ही मुकाम हासिल किया जा सकता है। इसलिए मन लगाकर पढ़ाई करें, सफलता कदम चूमेगी।
10वीं में अव्वल यशिका : 98.6 प्रतिशत
डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवा करना चाहती है यशिका
दीक्षांत ग्लोबल स्कूल की 10वीं की छात्रा यशिका ने 98.6 प्रतिशत अंक हासिल कर नाम रोशन किया है। यशिका की मां मंजू ने बताया कि यशिका तब तक पढ़ाई करती है, जब तक उसका काम खत्म न हो जाए। भले ही इसमें कितना समय लग जाए वह आज का काम कल पर नहीं छोड़ती है। यशिका ने गणित व विज्ञान की ट्यूशन प्रेक्टिस के लिए ली थी। 11वीं में मेडिकल की पढ़ाई करना चाहती है और आगे जाकर डाक्टर बनना चाहती है।
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ये दिए टिप्स : जूनियरों को टिप्स देते हुए यशिका ने कहा कि पढ़ाई में आलस न करें। स्फूर्ति और लगातार पढ़ाई करने से सफलता कदम चूमती है।
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