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ये हैं चंडीगढ़ के ‘गली ब्वॉय’, न म्यूजिक सिस्टम और न ट्रेनिंग, फिर भी करते हैं रैप, जीते बिंदास

Wed, 06 Mar 2019 03:12 PM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ के ‘गली ब्वॉय’
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जोया अख्तर की फिल्म ‘गली ब्वॉय’ ने अंडरग्राउंड रैपर्स की जिंदगी से सभी को रूबरू कराया है। ये ऐसे रैपर्स हैं, जो बॉलीवुड की चकाचौंध से काफी दूर रहक अपनी चमक बिखेर रहे हैं। इस फिल्म में विवियन फर्नांडीस उर्फ डिवाइन की जिंदगी, उनका स्ट्रगल और फिर सक्सेस को दिखाया गया। डिवाइन के अलावा आज भी बहुत से ऐसे रैपर्स हैं जो अंडरग्राउंड होकर हिपहॉप म्यूजिक बना रहे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं चंडीगढ़ के कई ऐसे ‘गली ब्वॉय’ के बारे में जो शहर के स्लम एरिया में रहने के बावजूद अपने म्यूजिक और रैप से अपनी जिंदगी को अलग अंदाज में जीते हैं।  
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1. माइकल : खुद गाने लिखते और परफॉर्म करते
सेक्टर-25 कॉलोनी में रहने वाले माइकल को पंजाबी रैपर बोहेमिया का एक गाना इस कदर पसंद आया कि उन्होंने रैप लिखने शुरू किए और आज कई गाने रिलीज कर चुके हैं। शहर के विभिन्न जगहों, क्लबों में परफॉर्म कर चुके हैं। आज भले ही माइकल को बहुत से लोग जानते हैं, लेकिन कभी इनके पास जरूरत का सामान खरीदने तक के पैसे नहीं थे। घर की पूरी जिम्मेदारी आ गई थी।

माइकल 16 साल की उम्र से ही घर चलाने के लिए काम कर रहे हैं। रैपर, सिंगर के अलावा वह एक हेयर स्टाइलिस्ट हैं। साल 2012 में जब पहला गाना रिलीज किया उसके दो साल बाद ही पिता का देहांत हो गया। ऐसे में कुछ समय म्यूजिक से दूर रहे, लेकिन कभी अलग नहीं हो पाए। साल 2017 में फिर वापसी की। घर, परिवार और नौकरी के बाद जो समय बचता है, उसमें माइकल गाने लिखते हैं और उन्हें खुद परफॉर्म करते हैं।
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2. स्कूबी और पॉक्श :  यू-ट्यूब पर वीडियो देख म्यूजिक बनाना सीखा
पंजाब यूनिवर्सिटी के वाई फाई से यू ट्यूब पर वीडियो देख म्यूजिक बनाना सीखा। रैपिंग करनी थी तो 10वीं कक्षा के एग्जाम के बाद की छुट्टियों में एक महीना काम किया। 5 हजार रुपये सैलरी मिली और उससे एक सैंमसंग का मोबाइल खरीदा। उससे पहली वीडियो शूट की और फिर यू ट्यूब पर डाला। कुछ ऐसी कहानी है सेक्टर-25 कॉलोनी में रहने वाले भाई स्कूबी और पॉक्श की। सेक्टर-26 स्थित खालसा के स्टूडेंट स्कूबी अपने भाई के साथ मिलकर काम करते हैं। दोनों ने मिलकर स्टार्टेड नाम का एक ग्रुप बनाया है। स्कूबी रैपिंग, म्यूजिक के अलावा वीडियो एडिटर, डीओपी भी करते हैं। दोनों भाई हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी में रैप लिखते भी हैं और परफॉर्म भी करते हैं।

3. नवीन उर्फ बार्क एक्स : पुलवामा अटैक पर रैप बनाकर आए चर्चा में
पुलवामा में जवानों पर हुए अटैक को लेकर बनाए रैप को लेकर चर्चा में आए धनास में रहने वाले नवीन उर्फ बार्क एक्स की जिंदगी भी काफी चुनौती भरी रही है। घर की समस्याओं को लेकर 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। दो जगहों पर काम कर वह अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। इसके बावजूद म्यूजिक और रैपिंग से प्यार कम नहीं हुआ। 2010 में बोहेमिया का एक गाना क्या सुना रैपिंग के फैन हो गए। अभी 7-8 गाने गा चुके हैं। अपने रैप के माध्यम से अपनी जिंदगी की कहानी कहते हैं। यूथ को मोटिवेट करने की कोशिश करते हैं।
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4. विश पॉइसन : रैपर एमिनेम को देख ली सीख
अंग्रेजी रैपर एमिनेम को पहली बार साल 2006 में सुना तो ऐसा लगा कि यही जिंदगी की असली सच्चाई है। एमिनेम का रैप में खुद की सच्चाई देखी और सोच लिया कि ऐसा ही बनना है। सेक्टर-25 की स्लम को लेकर कई बार लिखा। स्कूल के समय होने वाले प्यार को लेकर सबसे पहला गाना लिखा। अभी तक 4 से 5 गाने रिलीज कर चुके हैं। शहर के विभिन्न जगहों, क्लबों में परफार्म किया है। गरीबी की वजह से पैसों और इक्यूपमेंट्स की कमी थी, फिर भी मेहनत की और असली हिपहॉप क्या होता है, उससे चंडीगढ़ को रूबरू कराया। उन्होंने एक ‘रैपटूरियर्स रिकॉड्स’ बनाया है, जिसका मकसद टैलेंटिड बच्चों को आगे लाना है। विश पॉइसन हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी में रैप लिखते भी हैं और परफॉर्म भी करते हैं।

5. ब्राउन ब्यॉय : सात गानों में दे चुके हैं म्यूजिक
हिपहॉप म्यूजिक ब्राउन बॉय का बचपन से शौक रहा है। डड्डूमाजरा कॉलोनी में रहते उन्होंने बहुत कुछ देखा और सीखा। वह खुद गाना लिखते, गाते और म्यूजिक देते हैं। इसके अलावा उन्होंने कनाडा में बैठे आर्टिस्ट के लिए भी म्यूजिक बनाया है। बहुत ही साधारण परिवार के संबंध रखने वाले ब्राउन ब्यॉय घर चलाने के लिए एडवटाइजिंग कंपनी में नौकरी कर रहे हैं। घर पहुंचने के बाद जो भी समय बचता है वह म्यूजिक के नाम होता है। अभी तक करीब 7 गानों के लिए म्यूजिक दे चुके हैं।
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