पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को सब्सिडी और कर्मचारियों के वेतन तथा सेवानिवृत्ति के लाभ का बकाया पांच दिनों में अदा करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने सरकार से मंगलवार को इसकी रिपोर्ट भी मांगी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि अदायगी के लिए रकम नहीं है, तो सब्सिडी की व्यवस्था ही बंद कर देनी चाहिए। हाईकोर्ट की ओर से यह मौखिक टिप्पणी सरकार की ओर से वीरवार को कोई जवाब न देने पर की गई।
पिछली सुनवाई पर सरकार से सभी प्रकार की सब्सिडी रिपोर्ट मांगी गई थी। यह भी पूछा गया था कि कितनी योजनाओं के तहत सब्सिडी दी जा रही है और अदायगी की स्थिति क्या है।
वीरवार को सरकारी वकील ने कहा कि उद्योगपतियों की सब्सिडी के चेक तैयार हैं, लेकिन बेंच ने कहा कि पांच दिन में सब्सिडी समेत अन्य सब्सिडी के अलावा कर्मचारियों के वेतन व सेवानिवृत्ति लाभों के बकाए का भुगतान कर रिपोर्ट पेश की जाए।
सब्सिडी के लिए पैसा नहीं तो तीर्थ यात्रा योजना के लिए पैसा कहां से आया
पंजाब में उद्योग को मजबूत बनाने के लिए वर्ष 1996 में सब्सिडी देने की नीति बनाई गई थी, लेकिन यह सब्सिडी 20 साल तक नहीं दी गई। इसी पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने सरकार से पूछा था कि सब्सिडी के लिए पैसा नहीं है तो मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के लिए पैसा कहां से आ रहा है। पिछली सुनवाई पर मुख्य सचिव सर्वेश कौशल ने शपथ पत्र के माध्यम से कहा था कि यह योजना लेजिस्लेचर के विशेषाधिकार के दायरे में आती है।
सरकार जनहित के कार्यों पर खर्च के लिए अधिकृत है। मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता की मजबूती के लिए शुरू की गई। इस योजना पर खर्च कंसॉलिडेटेड फंडों से जुटाया जा रहा है। इसके अलावा तीर्थ दर्शन यात्रा हेड, टूरिज्म हेड और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा हेड से पैसा जुटाया गया है। कुल बजट 46.50 करोड़ रुपये का है।