नगर निगम के विवादास्पद स्टडी टूर मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने भी गंभीरता से लिया है। पीएम ऑफिस ने यूटी प्रशासक शिवराज पाटिल को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
शहर के समाजसेवी संजीव राणा ने तीन महीने पहले स्टडी टूर के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शिकायत भेजकर टूर पर गए पार्षदों और अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
शिकायत में कहा गया था कि इस स्टडी टूर से शहर को अब तक कोई फायदा नहीं मिला। इसके बावजूद हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं और टूर पर जाकर पार्षद व अफसर सिर्फ मौज मस्ती करते हैं।
तीन माह में रिपोर्ट तक नहीं बनी
नगर निगम का यह स्टडी टूर 31 अगस्त से 9 सितंबर के बीच चेन्नई, अंडमान-निकोबार और कोलकाता गया था। इस पर नगर निगम के करीब 28 लाख रुपये खर्च हुए थे।
नियमों के मुताबिक, स्टडी टूर से लौटने के बाद 10 दिनों के भीतर सदन में रिपोर्ट पेश करनी होती है। इस साल के टूर को करीब तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक इसकी रिपोर्ट भी तैयार नहीं हो सकी है।
बीवी-बच्चों को ले गए थे टूर पर
नगर निगम के 20 पार्षद और छह अफसर इस टूर पर गए थे। कई पार्षद तो अपने साथ बीवी-बच्चों को भी साथ ले गए थे। मेयर पद की उम्मीदवार मानी जा रहीं भाजपा पार्षद आशा जसवाल इस टूर पर भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष की बेटी को अपनी भतीजी बताकर ले गई थीं। स्टडी टूर के बहाने पार्षद और अफसर ऐसी जगहों पर भी घूम आए, जो शेड्यूल में थीं ही नहीं।
सात वर्षों में स्टडी टूर पर 93 लाख खर्च
नगर निगम के स्टडी टूर पर ऑडिट डिपार्टमेंट ने भी आपत्ति जताई है। वर्ष 2007 से अभी तक नगर निगम के विभिन्न स्टडी टूर पर 93.99 लाख रुपये खर्च हुए हैं, जबकि इनसे शहर को कोई लाभ नहीं हुआ है।
कोट्स..........
स्टडी टूर पर जितना खर्च हुआ है, उसे पार्षदों और अफसरों से वसूलना चाहिए। मुझे प्रधानमंत्री पर भरोसा है। वे इस मुद्दे पर जरूर गंभीरता दिखाएंगे और उचित कार्रवाई भी होगी।
- संजीव राणा, समाजसेवी
इस स्टडी टूर पर जनता की कमाई का दुरुपयोग किया गया था। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। जनता के नुमाइंदों को इस तरह पब्लिक मनी वेस्ट करने का अधिकार नहीं है।
- सतिंदर सिंह, भाजपा पार्षद