चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई शुरू होना इस बार आसान नहीं है। मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। बार-बार विद्यार्थियों को पीयू के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट जाना पड़ रहा है। यानी पीयू के निर्णयों से छात्र संतुष्ट नहीं हैं। पीयू को इस प्रकिया को बेहतर बनाने के लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन करना चाहिए था ताकि छात्रों के दाखिले समय से हो पाते और कक्षाएं शुरू हो जातीं।
पीयू के यूआईएलएस विभाग की ओर से पांच वर्षीय कानून की पढ़ाई करवाई जाती है। इस विभाग में दाखिले लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या काफी होती है। हर साल इसके लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करवाई जाती है, लेकिन इस बार कोरोना के कारण मेरिट से दाखिले की प्रक्रिया रख दी गई। आवेदन मांगे गए और उसके बाद कुछ विद्यार्थी हाईकोर्ट चले गए। उनकी मांग थी कि प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाए। पीयू ने इसका जवाब दिया। उसके बाद फिर पीयू ने टेंटेटिव मेरिट जारी की। उसमें इंटर में कानून की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को दो फीसदी अंकों का बेनिफिट दे दिया जबकि इसका जिक्र प्रॉस्पेक्ट्स में नहीं किया गया था। काफी विरोध हुआ और आखिर में पीयू को वापस लेना पड़ा। अब फिर से मेरिट को लेकर विद्यार्थी संतुष्ट नहीं हैं। मामला हाईकोर्ट में चला गया। सूत्रों का कहना है कि विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं। न तो दाखिले की प्रक्रिया पूरी हो रही है और न ही कक्षाएं शुरू हो रही हैं। हालांकि पीयू ने काउंसलिंग की तिथियां घोषित कर दी थीं। आगे की प्रक्रिया चल रही है।