चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट में स्नातक वर्ग के सदस्यों की संख्या में कटौती के बाद छात्र परेशान हैं। उनका कहना है कि यह सदस्य अधिकांश ग्रामीण इलाकों से आते हैं। छात्रों के सीधे संपर्क में रहते हैं। उनके मुद्दों को सीनेट में उठाते हैं, लेकिन अब सदस्यों की कटौती से उन्हें नुकसान होगा। वह चाहते हैं कि इनकी संख्या में चांसलर कार्यालय से कटौती न हो।
पीयू शासन सुधार के लिए बनाई गई हाई पावर कमेटी ने सीनेट में सदस्यों की संख्या घटाकर 47 करने की सिफारिश की है, जो चांसलर कार्यालय को भेजी गई है। सीनेट में अलग-अलग वर्ग से सदस्य चुनकर आते हैं। इनमें स्नातक वर्ग से 15 सदस्य होते हैं। इनके लिए देशभर में बूथ बनते हैं। लाखों छात्र मतदान करते हैं। शासन सुधार वाली समिति ने स्नातक वर्ग चुनाव प्रक्रिया को लगभग खत्म कर दिया है। इससे छात्रों में आक्रोश है। पीयू के छात्र विक्रम शर्मा, सुमित कुमार, सुधांशु शर्मा आदि ने चांसलर से कहा है कि समिति की इन सिफारिशों को न माना जाए। यदि स्नातक वर्ग को खत्म कर दिया गया तो छात्रों को नुकसान होगा। उनका प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य सीनेट में नहीं पहुंच पाएंगे।