फेज छह में सरकारी कालेज एवं सिविल अस्पताल के आसपास अक्सर महिला कमांडो तैनात रहती हैं। सोमवार को भी वह ड्यूटी पर मुस्तैद थीं। दोपहर करीब 11.57 बजे उन्होंने सिविल अस्पताल के बाहर झगड़ा होते देखा।
दोनों ने स्कूटर से दौड़ लगा दी और हमलावरों को ललकारा। कमांडो के साहस को देखते हुए उधर से गुजरते अन्य राहगीरों ने उनका उत्साहवर्धन किया। पुलिस की संभावित कार्रवाई से सहम कर हमलावर आनन-फानन में भाग गए।
सार्वजनिक स्थान पर खुलेआम इस तरह के हमले से आसपास सनसनी फैल गई। झगड़ा होते देख लोग सहम गए।
सिविल अस्पताल के थोड़ा सा आगे सड़क के दूसरी तरफ सरकारी कॉलेज है। यहां सेमिनार चल रही थी।
सेमिनार में शिक्षामंत्री सिकंदर सिंह मलूका भाषण दे रहे थे। वहां विभागीय अफसर एवं शिक्षाविद् भी थे। मंत्री के साथ उनके सुरक्षा कर्मी भी थे।
बताते हैं जब छात्र गुट सिविल अस्पताल के फुटपाथ पर भिड़ रहे थे, तो गेट पर एक पुलिसकर्मी खड़ा था। परंतु उसने मौके पर जाने का साहस नहीं जुटाया। वैसे सुरक्षा की दृष्टि से अस्पताल के अंदर ही पुलिस चौकी भी है।
शोर हुआ किंतु वहां से भी कोई पुलिस कर्मचारी नहीं आया। परंतु महिला कमांडो ने हमलावरों की परवाह न करते हुए उन्हें ललकारा और उनके पीछे भागीं।
इसके बाद हमलावर फेज छह की तरफ भाग गए। महिला कमांडो ने ही जख्मी छात्र को इलाज के लिए अस्पताल लेकर गईं।
अस्पताल के बाहर एवं अंदर लोग महिला कमांडों की बहादुरी की तारीफ कर रहे थे। अन्य पुलिसकर्मी काफी देर बाद मौके पर पहुंचे।
सुरक्षा व्यवस्था की कमी दिखी
सरकारी कालेज और सिविल अस्पताल के आसपास इस तरह की घटना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। फिर सरकारी कालेज में तो सेमिनार हो रही थी। उसमें शिक्षा मंत्री मौजूद थे।
शोर हुआ था। परंतु किसी ने नहीं सुना। अस्पताल के सुरक्षाकर्मी कहां थे। फिर ऐसे स्थानों पर पीसीआर तैनात होनी चाहिए, ताकि सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली संभावित घटनाओं से निपटा जा सके।