कोरोना महामारी की वजह से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं व बारहवीं की बची परीक्षाओं को निरस्त कर एक फार्मूले के तहत रिजल्ट देने का फैसला लिया है। सीबीएसई की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, यदि किसी छात्र ने तीन से ज्यादा विषयों की परीक्षा दी है तो तीन विषयों में प्राप्त किए गए सबसे ज्यादा नंबर के औसत के आधार पर बाकी विषयों के नंबर दिए जाएंगे, जिनकी परीक्षा नहीं हुई है।
इसी तरह यदि किसी छात्र ने केवल तीन विषयों की परीक्षा दी है तो दो विषयों में सबसे ज्यादा प्राप्त किए गए नंबर के औसत के आधार पर बाकी विषयों के नंबर दिए जाएंगे। जब से फार्मूला जारी हुआ है, तभी से विद्यार्थी और पैरेंट्स नंबरों के आकलन में जुट गए हैं। हालांकि, बची परीक्षाओं के नए नियम से चंडीगढ़ के विद्यार्थियों को नुकसान होने की आशंका काफी कम है क्योंकि दसवीं के सभी पेपर हो चुके हैं, जबकि बारहवीं की कुछ ही विषयों की परीक्षाएं बची हैं।
इनमें मुख्य रूप से बिजनेस स्टडीज, होम साइंस, कंप्यूटर एप्लीकेशन, जियोग्राफी, सोशियोलाजी व हिंदी के पेपर रहते हैं। जिन विषयों के एग्जाम हो चुके हैं, उनमें होनहार विद्यार्थियों को नंबर अच्छे आते हैं। श्री गुरु हरकिशन मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल हरप्रीत कौर ने बताया कि उनके स्कूल में सिर्फ साइंस के विद्यार्थी हैं। उनके सभी विद्यार्थियों के पेपर हो चुके हैं। ऐसे में नए फार्मूले का उनके विद्यार्थियों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है।
दूसरे राज्यों की बात करें तो जैसे दिल्ली व अन्य राज्यों, जहां विद्यार्थियों के मुख्य विषयों की परीक्षा अभी तक नहीं हो पाई है। वहां पर विद्यार्थियों को अच्छा स्कोर हासिल करने में थोड़ी परेशानी आ सकती है। ऐसे में चंडीगढ़ के छात्र इस फार्मूले के प्रति सुनिश्चित हैं। हालांकि, उनकी असल चिंता बारहवीं के बाद होने वाले दाखिले को लेकर है।
कॉलेज के दाखिले में बोर्ड के अंकों पर हो छूट
सेक्टर 8 गवर्नमेंट स्कूल के फिजिक्स के लेक्चरार परमजीत सिंह ने बताया कि कोरोना महामारी के समय में बोर्ड ने बीच का रास्ता निकाला है। जो सही भी है, इस समय विद्यार्थियों का जीवन सबसे अहम है, लेकिन अब कॉलेजों को भी दाखिला अंकों के बजाए परीक्षा के आधार पर देना होगा।
विद्यार्थियों के लिए फायदेमंद
शिशु निकेतन मॉडल स्कूल सेक्टर-38 की प्रिंसिपल वीणा अरोड़ा ने बताया कि परीक्षा नहीं होने के कारण स्टूडेंट्स परेशान हो रहे थे। ऐसी कठिन परिस्थितियों में यह फैसला उचित है। जो टॉपर्स विद्यार्थी हैं, वो अभी भी अच्छा स्कोर कर लेंगे। उनके अंकों पर कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। क्योंकि हर विषय पर बराबर मेहनत कर अच्छे अंक लेने की कोशिश करते हैं।
ग्रेजुएशन का एडमिशन चिंता का विषय
साल 2019 में बारहवीं के टॉपर दिशांक ने बताया कि इस समय विद्यार्थियों का स्वास्थ्य ही प्राथमिकता होना चाहिए। स्टूडेंट्स के लिए आगे कॉलेज एडमिशन भी चिंता का विषय रहेगा। दिल्ली यूनिवर्सिटी और कई कॉमर्स कॉलेजों में 12वीं के एक नंबर कम होने के कारण भी दाखिला नहीं मिल पाता। ऐसे में स्टूडेंट्स को जहां 12वीं के नंबर के आधार पर एडमिशन होंगे, वहां समस्या आ सकती है।
विद्यार्थियों के हित में फैसला
सेक्टर-18 जीएमएसएसएस प्रिंसिपल राजबाला बेनीवाल ने बताया कि बोर्ड के पास इसके अलावा और दूसरा कोई विकल्प भी नहीं है। जिन स्टूडेंट्स ने अच्छे से मेहनत करके परीक्षाएं दी हैं, वे औसत मार्किंग में भी अच्छा स्कोर करेंगे। वहीं, औसत विद्यार्थियों को भी अच्छे नंबर मिलेंगे। ऐसे कठिन हालात में यह फैसला विद्यार्थियों के हित में है।
विद्यार्थियों को मिलेगी राहत
श्री गुरु हरकिशन स्कूल की प्रिंसिपल हरप्रीत कौर ने बताया कि परीक्षाएं खत्म नहीं होने से विद्यार्थी और अभिभावक चिंता में थे। दोनों को लग रहा था कि कहीं उनकी मेहनत बेकार न चली जाए। इस फैसले से राहत मिली है। बोर्ड के रिजल्ट के बिना आगे कॉलेजों में भी दाखिला नहीं शुरू हो पा रहा था।
कॉलेज दाखिले पर पड़ेगा प्रभाव
हंसराज पब्लिक स्कूल की 12वीं की हेड गर्ल अनन्या अग्रवाल का कहना है कि जिन स्टूडेंट्स ने परीक्षा के लिए मेहनत की थी, उनके लिए यह थोड़ा गलत होगा। बिजनेस स्टडीज मुख्य विषय है, जिनमें अच्छे नंबर की गुंजाइश रहती है। कॉमर्स कॉलेजों में दाखिले के दौरान भी बारहवीं के अंकों का प्रभाव पड़ेगा। भविष्य में नौकरी पर भी अनिश्चितता के बादल छाए रहेंगे।